भीलवाड़ा | KP Times Report
महात्मा गांधी जिला चिकित्सालय (एमजीएच) के मातृ एवं शिशु चिकित्सालय (एमसीएच) में हाल के दिनों में हुई महिलाओं की मौतों को लेकर उठे सवालों के बीच जिला प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन ने अपनी आधिकारिक स्थिति स्पष्ट कर दी है। जिला कलेक्टर जसमीत सिंह संधू के निर्देश पर अस्पताल प्रशासन ने विस्तृत तथ्य सार्वजनिक करते हुए दावा किया है कि जिन पांच मरीजों की मौत हुई, वे सभी अलग-अलग गंभीर चिकित्सीय जटिलताओं का परिणाम थीं और किसी भी मामले में ऑपरेशन थियेटर संक्रमण (OT Infection) मृत्यु का कारण नहीं पाया गया।
प्रशासन ने साथ ही यह भी स्वीकार किया कि एक ऑपरेशन थियेटर की माइक्रोबायोलॉजिकल कल्चर रिपोर्ट में संक्रमण मिलने के बाद उसे तत्काल बंद कर दिया गया था, लेकिन दावा किया कि 29 जून 2026 के बाद उस ऑपरेशन थियेटर में कोई भी ऑपरेशन नहीं किया गया।
इधर, पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए जिला कलेक्टर ने उच्चस्तरीय जांच समिति गठित कर दी है, जिसकी रिपोर्ट आने के बाद आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
मुख्य बिंदु
- पांच महिलाओं की मौत पर अस्पताल प्रशासन ने जारी किया विस्तृत स्पष्टीकरण।
- सभी मौतों का कारण अलग-अलग गंभीर मेडिकल जटिलताएं बताया।
- किसी भी मरीज की मृत्यु को ऑपरेशन थियेटर संक्रमण से जोड़ने से इनकार।
- संक्रमण मिलने के बाद OT नंबर-2 को 29 जून से बंद रखने का दावा।
- जिला कलेक्टर ने अस्पताल का औचक निरीक्षण कर जांच समिति गठित की।
- रिपोर्ट आने के बाद होगी आगे की कार्रवाई।
क्या है पूरा मामला?
पिछले कुछ दिनों में महात्मा गांधी अस्पताल के एमसीएच विंग में लगातार महिलाओं एवं प्रसूताओं की मौत के बाद अस्पताल की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल उठे थे। सोशल मीडिया से लेकर विभिन्न समाचार माध्यमों में ऑपरेशन थियेटर में संक्रमण, स्टेराइल उपकरणों की कमी और संक्रमण नियंत्रण व्यवस्था को लेकर कई दावे किए गए।
इन खबरों के बाद जिला प्रशासन सक्रिय हुआ। शनिवार सुबह जिला कलेक्टर जसमीत सिंह संधू स्वयं अस्पताल पहुंचे, व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया और अस्पताल प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट ली।
इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने विस्तृत प्रेस नोट जारी कर पूरे घटनाक्रम पर अपना पक्ष रखा।
पांचों मामलों में क्या हुआ?
अस्पताल प्रशासन ने प्रत्येक मरीज की मेडिकल हिस्ट्री सार्वजनिक करते हुए बताया कि सभी मौतें अलग-अलग चिकित्सीय कारणों से हुईं।
1. फोरी देवी
फोरी देवी को बच्चेदानी (Gyne Case) के ऑपरेशन के लिए भर्ती किया गया था। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि वे प्रसूता नहीं थीं।
- भर्ती : 30 जून
- ऑपरेशन : 1 जुलाई
- मृत्यु : 7 जुलाई
मृत्यु का कारण
- मायोकार्डियल इन्फार्क्शन (हार्ट अटैक)
2. शिमला गुर्जर
शिमला गुर्जर को गंभीर हालत में उप-जिला अस्पताल गुलाबपुरा से रेफर किया गया था।
महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि एमजी अस्पताल में उनका कोई ऑपरेशन नहीं हुआ।
मृत्यु के कारण
- Hypovolemic Shock
- Acute Gastroenteritis
- Septicemia
- IUD
- Severe Anaemia
3. ईशा पाण्डेय
- भर्ती : 5 जुलाई
- ऑपरेशन : 6 जुलाई
- मृत्यु : 8 जुलाई
कारण
- Pulmonary Thromboembolism
4. दिव्या सेन
दिव्या सेन को सीएचसी रायपुर से गंभीर स्थिति में रेफर किया गया था।
उनका उसी दिन ऑपरेशन किया गया।
मृत्यु के कारण
- HELLP Syndrome
- Eclampsia
- Pregnancy Induced Hypertension
5. संगीता जीनगर
- भर्ती : 9 जुलाई
- ऑपरेशन : 9 जुलाई
- मृत्यु : 10 जुलाई
कारण
- Atonic Post Partum Haemorrhage
- Disseminated Intravascular Coagulation (DIC)
ऑपरेशन थियेटर संक्रमण पर क्या कहा अस्पताल ने?
सबसे बड़ा सवाल ऑपरेशन थियेटर में संक्रमण को लेकर उठ रहा था।
अस्पताल प्रशासन ने स्वीकार किया कि ऑपरेशन थियेटर नंबर-2 की नियमित माइक्रोबायोलॉजिकल जांच के दौरान संक्रमण पाया गया था।
हालांकि प्रशासन का कहना है—
- संक्रमण रिपोर्ट आने के तुरंत बाद OT बंद कर दिया गया।
- 29 जून 2026 के बाद उस OT में कोई ऑपरेशन नहीं हुआ।
- मृत मरीजों का उस OT से कोई संबंध नहीं है।
- संक्रमण नियंत्रण की प्रक्रिया पूरी तरह मानकों के अनुरूप अपनाई गई।
स्टेराइल सेट को लेकर भी दिया जवाब
कुछ रिपोर्टों में केवल पांच स्टेराइल ऑपरेशन सेट होने का दावा किया गया था।
अस्पताल प्रशासन ने इसे पूरी तरह गलत बताया।
पीएमओ के अनुसार—
- अस्पताल में कुल 22 स्टेराइल सेट उपलब्ध हैं।
- आवश्यकता अनुसार उनका स्टेरिलाइजेशन किया जाता है।
- प्रतिदिन औसतन 15 से 20 सीजेरियन ऑपरेशन किए जाते हैं।
जिला कलेक्टर ने क्या कार्रवाई की?
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला कलेक्टर जसमीत सिंह संधू ने शनिवार सुबह अस्पताल का निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने—
- अस्पताल प्रशासन से विस्तृत जानकारी ली।
- संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
- पूरे प्रकरण की जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित की।
प्रशासन का कहना है कि समिति माइक्रो लेवल पर प्रत्येक मामले की जांच करेगी और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
अस्पताल प्रशासन का पक्ष
पीएमओ डॉ. अरुण गौड़ के अनुसार—
- मरीजों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
- संक्रमण नियंत्रण समिति नियमित कार्य कर रही है।
- डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और पैरामेडिकल कर्मचारियों को समय-समय पर प्रशिक्षण दिया जाता है।
- यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
KP Times Analysis
यह मामला केवल पांच मौतों तक सीमित नहीं है बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था में विश्वास से भी जुड़ा हुआ है।
प्रशासन ने पहली बार विस्तार से प्रत्येक मरीज की मेडिकल स्थिति सार्वजनिक की है, जिससे कई भ्रम दूर करने की कोशिश की गई है।
हालांकि कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न अभी भी जांच के दायरे में हैं—
- OT में संक्रमण मिला तो संक्रमण का स्रोत क्या था?
- संक्रमण मिलने के बाद SOP का पूरी तरह पालन हुआ या नहीं?
- क्या सभी संक्रमण नियंत्रण प्रोटोकॉल समय पर लागू किए गए?
- क्या रेफरल मरीजों की स्थिति पहले से अत्यधिक गंभीर थी?
- क्या इलाज की समयबद्धता में कहीं कमी रही?
इन सभी सवालों का अंतिम उत्तर अब जांच समिति की रिपोर्ट से ही सामने आएगा।
जनता पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
यह घटनाक्रम पूरे जिले की मातृ स्वास्थ्य सेवाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
यदि जांच में अस्पताल प्रशासन के दावे सही पाए जाते हैं तो इससे फैली कई आशंकाओं पर विराम लग सकता है।
यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई संभव है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार—
- HELLP Syndrome,
- Pulmonary Thromboembolism,
- Septicemia,
- Massive Postpartum Haemorrhage
ऐसी गंभीर स्थितियां हैं जिनमें समय पर उपचार के बावजूद मृत्यु का जोखिम बना रहता है।
हालांकि संक्रमण नियंत्रण और अस्पताल प्रबंधन के मानकों का पालन प्रत्येक संस्थान के लिए अनिवार्य होता है।
आगे क्या होगा?
जांच समिति—
- सभी मेडिकल रिकॉर्ड का अध्ययन करेगी।
- ऑपरेशन नोट्स की समीक्षा करेगी।
- संक्रमण नियंत्रण रिकॉर्ड की जांच करेगी।
- संबंधित चिकित्सकों एवं स्टाफ के बयान दर्ज करेगी।
- जिला प्रशासन को रिपोर्ट सौंपेगी।
रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक प्रशासनिक एवं अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
KP Times Fact Check
दावा: पांचों महिलाओं की मौत ऑपरेशन थियेटर संक्रमण से हुई।
आधिकारिक स्थिति: अस्पताल प्रशासन ने इससे इनकार किया है।
स्थिति: अंतिम निष्कर्ष जांच समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा।
