भीलवाड़ा। शहर के कोतवाली थाना क्षेत्र स्थित काइन हाउस में गौवंशों की लगातार हो रही मौतों को लेकर शनिवार को बड़ा विवाद खड़ा हो गया। गौ सेवकों ने काइन हाउस के बाहर धरना शुरू कर दिया और व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल उठाए। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि 800 क्षमता वाले काइन हाउस में 1200 से अधिक गौवंशों को रखा गया है, जिसके कारण पिछले एक सप्ताह में 51 गौवंशों की मौत हो चुकी है।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने खोली दर्दनाक सच्चाई इधर, गौवंशों की मौतों को लेकर उठ रहे सवालों के बीच शनिवार सुबह सीनियर मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. तरुण कुमार गौड़ एवं डॉ. महेश काष्ठ ने एक मृत नंदी का पोस्टमार्टम किया।
पोस्टमार्टम में मृत गौवंश के पेट से करीब 30 से 40 किलो तक प्लास्टिक की थैलियां, कचरा और जूतों के सोल निकले। चिकित्सकों के अनुसार, काइन हाउस में लाए जाने वाले अधिकांश बेसहारा गौवंश वर्षों तक सड़कों और कचरा डंपिंग यार्ड में प्लास्टिक व जहरीला कचरा खाते रहते हैं, जिससे उनका पाचन तंत्र पूरी तरह खराब हो जाता है।
डॉक्टरों ने बताया कि ऐसे पशुओं को रेस्क्यू कर इलाज और पौष्टिक आहार देने के बावजूद कई बार उनका शरीर भोजन स्वीकार नहीं कर पाता और उनकी मृत्यु हो जाती है। पेट में जमा पॉलीथिन के कारण वे सामान्य चारा भी नहीं खा पाते, जिससे उनकी हालत लगातार बिगड़ती जाती है।“दोष किसका?” बना बड़ा सवालघटना के बाद शहर में काइन हाउस और मुस्कान फाउंडेशन की व्यवस्थाओं को लेकर बहस तेज हो गई है। वहीं कई सामाजिक संगठनों और पशु प्रेमियों का कहना है कि असली समस्या शहर में फैला प्लास्टिक कचरा और बेसहारा गौवंशों के प्रति सामाजिक लापरवाही है।
उनका कहना है कि जिन नंदी और गायों को आज काइन हाउस में लाया जा रहा है, वे वर्षों तक सड़कों पर कचरा खाने को मजबूर रहे। ऐसे में केवल संस्था या निगम को दोष देना समाधान नहीं है।
मुस्कान फाउंडेशन और नगर निगम का कहना है कि वे बेसहारा पशुओं को बचाने और शहर को “बेसहारा पशु मुक्त” बनाने के प्रयास में जुटे हैं, लेकिन बढ़ती संख्या और खराब स्वास्थ्य स्थिति बड़ी चुनौती बनी हुई है।समाज के लिए चेतावनीपशु चिकित्सकों ने साफ कहा कि यदि शहर में खुले में प्लास्टिक और कचरा फेंकने की प्रवृत्ति नहीं रुकी, तो गौवंश इसी तरह असमय मौत का शिकार होते रहेंगे। यह मामला केवल काइन हाउस की व्यवस्थाओं तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए गंभीर चेतावनी है।
