भीलवाड़ा। लाडो स्पोर्ट्स एकेडमी ने शहर एवं आसपास की कच्ची बस्तियों में बिना मान्यता के संचालित निजी विद्यालयों को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से व्यापक जांच अभियान चलाने की मांग की है। एकेडमी का कहना है कि इन विद्यालयों में बड़ी संख्या में दिहाड़ी मजदूरों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे अध्ययन कर रहे हैं, जबकि अधिकांश अभिभावकों को यह जानकारी नहीं होती कि संबंधित विद्यालय मान्यता प्राप्त हैं या नहीं।
एकेडमी के अनुसार, हाल ही में जिला शिक्षा विभाग द्वारा जारी आदेश में चार विद्यालयों के विरुद्ध बिना मान्यता अथवा विभागीय स्वीकृति के बिना स्थान परिवर्तन कर विद्यालय संचालित किए जाने का उल्लेख किया गया है। संस्था का कहना है कि यह समस्या केवल कुछ विद्यालयों तक सीमित नहीं हो सकती और जिले के अन्य क्षेत्रों में भी ऐसे मामलों की जांच की जानी चाहिए।
लाडो स्पोर्ट्स एकेडमी के संस्थापक एडवोकेट लक्ष्मण सिंह राठौड़ ने कहा कि शिक्षा प्रत्येक बच्चे का संवैधानिक अधिकार है। यदि कोई विद्यार्थी लंबे समय तक ऐसे विद्यालय में पढ़ाई करता है, जिसकी मान्यता नहीं है, तो भविष्य में उसके प्रमाण-पत्र, उच्च शिक्षा और शैक्षणिक प्रगति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि गरीब और श्रमिक परिवार अपने बच्चों के बेहतर भविष्य की उम्मीद से उन्हें स्कूल भेजते हैं, इसलिए इस विषय को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि केवल शिकायत मिलने पर कार्रवाई करने के बजाय पूरे जिले में विशेष अभियान चलाकर कच्ची बस्तियों और ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित निजी विद्यालयों की जांच कराई जाए। साथ ही यदि किसी विद्यालय के पास आवश्यक मान्यता नहीं है, तो वहां अध्ययनरत बच्चों को निकटवर्ती मान्यता प्राप्त विद्यालयों में प्रवेश दिलाने की समुचित व्यवस्था की जाए, ताकि उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो।
एकेडमी की प्रमुख मांगें
- जिले के सभी निजी विद्यालयों की मान्यता की व्यापक जांच कराई जाए।
- बिना मान्यता संचालित विद्यालयों के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाए।
- श्रमिक एवं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को मान्यता प्राप्त विद्यालयों में प्रवेश के प्रति जागरूक करने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए।
- प्रभावित बच्चों की शिक्षा बाधित न हो, इसके लिए वैकल्पिक प्रवेश और शैक्षणिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
एकेडमी ने कहा कि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और मान्यता प्राप्त शिक्षा उपलब्ध कराना समाज और प्रशासन की साझा जिम्मेदारी है। संस्था ने प्रशासन से इस विषय को नियमों के उल्लंघन के साथ-साथ बच्चों के भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण सामाजिक मुद्दे के रूप में देखने का आग्रह किया।
