सात बार के विजेता नज़ीर सरवरी को रईश केजीएन ने दी मात, वार्ड 17 में भतीजे मुजम्मिल ने चाचा नसीब दाद पठान को 263 वोटों से हराया
जहाजपुर (मोहम्मद आज़ाद नेब) नगर पालिका चुनाव के नतीजों में मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में कई चौंकाने वाले परिणाम सामने आए हैं। वर्षों से चुनावी मैदान में अपना दबदबा बनाए रखने वाले अनुभवी चेहरों को इस बार उभरते हुए नए चेहरों ने शिकस्त देकर जहाजपुर की स्थानीय राजनीति में बदलाव के संकेत दिए हैं।
वार्ड नंबर 16 में सबसे बड़ा सियासी उलटफेर देखने को मिला, जहां लगातार सात बार चुनाव जीत चुके मुस्लिम दिग्गज नेता एवं अंजुमन कमेटी के सदर नज़ीर सरवरी को उभरते मुस्लिम चेहरे रईश केजीएन ने मात दे दी। खास बात यह रही कि दोनों प्रत्याशी निर्दलीय के रूप में चुनाव मैदान में थे। लंबे समय से वार्ड की राजनीति में मजबूत पकड़ रखने वाले नज़ीर सरवरी की हार को चुनाव परिणामों का बड़ा उलटफेर माना जा रहा है।
वार्ड 17 में चाचा पर भारी पड़ा भतीजे का सियासी दांव
वार्ड नंबर 17 में भी मुकाबला बेहद दिलचस्प रहा। दो बार पार्षद रह चुके एवं वक्फ बोर्ड के सदर नसीब दाद पठान को उनके ही भतीजे और कांग्रेस प्रत्याशी मोहम्मद मुजम्मिल शेर ने 263 वोटों से शिकस्त दी। एक ही परिवार के दो चेहरों के बीच हुए इस मुकाबले में युवा चेहरे की जीत ने स्थानीय सियासत में नई चर्चा छेड़ दी है।
वार्ड 15 में पहली बार तबस्सुम बी की एंट्री
वार्ड नंबर 15 में एडवोकेट फारूख अली की पुत्रवधू तबस्सुम बी ने पहली बार चुनाव मैदान में उतरकर जीत हासिल की। तबस्सुम बी ने कांग्रेस के चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ा और जीत दर्ज कर नगर पालिका की राजनीति में अपनी पहली पारी की शुरुआत की।
वार्ड 6 की सानिया बनीं जिले की सबसे कम उम्र की पार्षद
वार्ड नंबर 6 से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जीत दर्ज करने वाली सानिया खानम भी चुनाव परिणाम के साथ चर्चा में आ गईं। चुनाव के लिए आवेदन करने के बाद अपने चुनाव लड़ने के फैसले को Gen Z Protest से प्रभावित बताते हुए दिए गए बयान के चलते सानिया पहले ही मीडिया की सुर्खियों में आ चुकी थीं। अब जीत के बाद उन्हें भीलवाड़ा जिले की सबसे कम उम्र की पार्षद बनने का खिताब मिलने से उनकी राजनीतिक चर्चा और बढ़ गई है।
नतीजों ने दिए बदलाव के संकेत
जहाजपुर के मुस्लिम बाहुल्य वार्डों के इन परिणामों ने यह साफ कर दिया कि इस बार मतदाताओं ने केवल पुराने राजनीतिक चेहरों पर भरोसा नहीं जताया, बल्कि नए और युवा चेहरों को भी मौका दिया। सात बार के विजेता की हार से लेकर चाचा को भतीजे की शिकस्त और युवा सानिया खानम की जीत तक इन नतीजों ने जहाजपुर की मुस्लिम राजनीति में नई पीढ़ी के उभार की कहानी लिख दी है।
