कांग्रेस 3,403 पर सिमटी, 5,190 वोट ‘अन्य’ के खाते में
जहाजपुर (मोहम्मद आज़ाद नेब) नगर पालिका चुनाव के नतीजों ने शहर की सियासत का नया गणित सामने रख दिया है। कुल 16,627 मतदाताओं में से 14,565 वोट पड़े। इनमें भाजपा ने 5,784 वोट हासिल कर सबसे बड़ा वोट बैंक अपने नाम किया, जबकि कांग्रेस को 3,403 वोट ही मिल सके। वहीं अन्य प्रत्याशियों के खाते में 5,190 वोट जाना चुनावी समीकरण का सबसे दिलचस्प पहलू रहा।
भाजपा और कांग्रेस के बीच वोटों का अंतर 2,381 रहा। यानी जहां भाजपा ने अपने पक्ष में सबसे ज्यादा मत जुटाए, वहीं कांग्रेस इस अंतर को पाटने में कामयाब नहीं हो सकी।
‘अन्य’ ने दिखाया दम
चुनाव में अन्य प्रत्याशियों को मिले 5,190 वोट किसी भी राजनीतिक दल के लिए नजरअंदाज करने वाला आंकड़ा नहीं है। यह संख्या कांग्रेस के वोटों से भी 1,787 अधिक है। इससे साफ है कि कई वार्डों में निर्दलीय और अन्य प्रत्याशियों ने दोनों प्रमुख दलों के सामने मजबूत चुनौती पेश की।
भाजपा का वोट शेयर सबसे ज्यादा
डाले गए 14,565 मतों में भाजपा की हिस्सेदारी करीब 39.7 प्रतिशत, कांग्रेस की 23.4 प्रतिशत और अन्य प्रत्याशियों की करीब 35.6 प्रतिशत रही। नोटा को 142 वोट मिले।
शहर की सियासत में बदला संदेश
चुनाव के आंकड़े यह संकेत दे रहे हैं कि जहाजपुर में भाजपा ने अपना मजबूत जनाधार बनाए रखा, जबकि कांग्रेस को संगठन और वोटों के बिखराव का नुकसान उठाना पड़ा। दूसरी ओर बड़ी संख्या में ‘अन्य’ प्रत्याशियों को मिले वोट बताते हैं कि पालिका चुनाव में स्थानीय समीकरण, व्यक्तिगत पकड़ और वार्ड स्तर की राजनीति ने भी अहम भूमिका निभाई।
अब इन आंकड़ों के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि क्या भाजपा की जीत केवल पार्टी के वोट बैंक का नतीजा है या स्थानीय नेतृत्व और वार्ड स्तर की रणनीति ने भी बड़ा खेल किया? वहीं कांग्रेस के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि 5,190 वोटों के इस बिखराव को अगले चुनाव में अपने पक्ष में कैसे जोड़ा जाए।
