मनोहरगढ़ में गूंजा देवनारायण का जयकारा, तीन दिवसीय मेले में उमड़ा आस्था का सैलाब

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लीलाधर घोड़े के जन्मोत्सव पर निकली भव्य शोभायात्रा, ध्वज परिक्रमा बनी आकर्षण का केंद्र

जहाजपुर (मोहम्मद आज़ाद नेब) उपखंड क्षेत्र के मनोहरगढ़ में भगवान श्री देवनारायण जी के तीन दिवसीय मेले का धार्मिक एवं उत्सवी माहौल में आयोजन हुआ। मेले में आस्था, भक्ति और लोक परंपराओं का संगम देखने को मिला। 14 सितंबर की रात भजन संध्या के साथ धार्मिक कार्यक्रमों का सिलसिला शुरू हुआ, वहीं 15 सितंबर की सुबह मंगल आरती के साथ मेले का विधिवत शुभारंभ किया गया।

यह मेला भगवान श्री देवनारायण जी के घोड़े लीलाधर के जन्मोत्सव, भादवा शुक्ल षष्ठी के अवसर पर आयोजित किया जाता है। 15 सितंबर को देव नगरी मनोहरगढ़ में आकर्षक झांकियों के साथ भव्य शोभायात्रा निकाली गई। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भगवान देवनारायण के जयकारे लगाए।

प्राचीन गर्भगृह आज भी कच्ची ईंटों से निर्मित

स्थानीय निवासी एवं शक्करगढ़ के व्याख्याता राजेश मीणा ने बताया कि मनोहरगढ़ स्थित देवनारायण मंदिर का गर्भगृह आज भी कच्ची ईंटों से निर्मित है। इसे मंदिर की प्राचीनता और वर्षों पुरानी धार्मिक परंपरा का प्रतीक माना जाता है।

मंदिर शिखर पर चढ़ाया विशाल ध्वज

16 सितंबर को मंदिर परिसर में विशाल ध्वज की परिक्रमा कर उसे मंदिर के शिखर पर चढ़ाया गया। इस धार्मिक परंपरा को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। ध्वज चढ़ाने का कार्यक्रम मेले के प्रमुख आकर्षणों में रहा।

हर शुक्रवार पाती-तांती की परंपरा

मंदिर से जुड़ी एक विशेष स्थानीय परंपरा के अनुसार प्रत्येक शुक्रवार को पाती एवं तांती के माध्यम से पेट दर्द और नसों से संबंधित रोगों के उपचार की मान्यता है। श्रद्धालु इसे भगवान देवनारायण का आशीर्वाद मानते हैं और दूर-दराज के क्षेत्रों से यहां पहुंचते हैं। हालांकि, यह स्थानीय धार्मिक मान्यता है और इसे आधुनिक चिकित्सकीय उपचार का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।

17 सितंबर को धार्मिक आयोजन के साथ तीन दिवसीय मेले का विधिवत समापन होगा। मेले ने एक बार फिर क्षेत्र की धार्मिक आस्था, लोक संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकता की तस्वीर प्रस्तुत की।

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