1 अक्टूबर से सख्त हुआ जन्म-मृत्यु पंजीकरण कानून – विलंब पर मजिस्ट्रेट की अनुमति अनिवार्य
अब देरी से नहीं बनेगा Birth Certificate – सरकार ने धारा 13(3) में किया बड़ा संशोधन
जहाजपुर (मोहम्मद आज़ाद नेब) सांख्यिकी विभाग ने जन्म और मृत्यु पंजीकरण को लेकर बड़ा बदलाव किया है। भारत सरकार द्वारा पारित जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण (संशोधन) अधिनियम, 2026 के प्रावधान राज्य में 1 अक्टूबर से प्रभावी होंगे।
तहसीलदार अमितेश मीणा ने बताया कि सरकार ने जन्म और मृत्यु पंजीकरण को लेकर बड़ा बदलाव किया है। भारत के महा रजिस्ट्रार कार्यालय की अधिसूचना 16 सितम्बर 2026 के अनुसार इसे 1 अक्टूबर से लागू किया जा रहा है।
क्या है नया संशोधन
अधिनियम की धारा 13(3) और नई धारा 13(3A) में संशोधन किया गया है। जन्म या मृत्यु के 1 साल से ज्यादा लेकिन 2 साल के भीतर बताया जाता है तो जन्म या मृत्यु का पंजीयन अब सीधे रजिस्ट्रार नहीं करेगा। इसके लिए जिला मजिस्ट्रेट या उप-खंड मजिस्ट्रेट (SDM) या जिला मजिस्ट्रेट द्वारा प्राधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट द्वारा घटना की शुद्धता का सत्यापन करने के बाद दिए गए आदेश और विहित फीस जमा होने पर ही पंजीयन होगा।
स्पष्टीकरण में बताया गया है कि कार्यपालक मजिस्ट्रेट से अभिप्राय भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 14(1) के अधीन नियुक्त अधिकारी से है।
ओर यदि जन्म या मृत्यु 2 साल के बाद बताया जाता है तो यह और भी सख्त हो गया है। दो वर्ष पश्चात दी गई सूचना का पंजीयन केवल प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर ही हो सकेगा, जिसके क्षेत्राधिकार में जन्म या मृत्यु हुई हो।
राजस्थान सरकार ने सभी कार्यपालक मजिस्ट्रेट, तहसीलदार, नगर निगम/नगर परिषद/नगर पालिका के रजिस्ट्रार और ग्राम पंचायत के रजिस्ट्रारों को 1 अक्टूबर 2026 से इन संशोधित प्रावधानों की अनिवार्य रूप से पालना कराने के निर्देश दिए हैं।
