कथा श्रवण करने उमड़ रहे श्रद्धालुओं के सैलाब के समक्ष छोटा प्रतीत हो रहा विशाल पांडाल
भीलवाड़ा। मेवाड़ की धरती पर पहली बार आयोजित श्री शिव महापुराण कथा में प्रख्यात कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा के प्रवचनों को सुनने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। मेडिसिटी ग्राउंड में चल रही सात दिवसीय कथा के चौथे दिन हालात ऐसे रहे कि विशाल पांडाल भी श्रद्धालुओं के सैलाब के आगे छोटा पड़ गया। दोपहर एक बजे से पहले ही सभी डोम और पांडाल पूरी तरह भर चुके थे और देर से पहुंचने वालों को बैठने में कठिनाई का सामना करना पड़ा।
कथा के दौरान पं. मिश्रा ने कहा कि भगवान को धन-दौलत नहीं, बल्कि सच्ची भावना प्रिय है। उन्होंने समझाया कि यदि मन शुद्ध हो तो घर का साधारण जल भी गंगाजल के समान हो जाता है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सम्मान उसी व्यक्ति का करना चाहिए जिसका आचरण श्रेष्ठ हो, केवल ऊंचे पद पर बैठने से कोई पूजनीय नहीं हो जाता।
उन्होंने परिवारिक जीवन पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि माता-पिता और पति-पत्नी के रिश्तों में सम्मान और समझ बेहद जरूरी है। जीवन में कितनी भी कठिनाइयां आएं, चेहरे की मुस्कान कभी नहीं खोनी चाहिए। गुरु के महत्व पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि केवल गुरु मंत्र ही नहीं, बल्कि गुरु के विचारों को जीवन में उतारना अधिक आवश्यक है।
कथा के चौथे दिन मंच पर कई संत-महात्माओं और अतिथियों ने व्यासपीठ पर विराजित पं. मिश्रा का स्वागत किया। कथा के प्रारंभ में विभिन्न श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना की, वहीं समापन पर जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों ने आरती में भाग लिया।
‘भीलवाड़ा में शिव का कुंभ जैसा माहौल’
पं. मिश्रा ने भीलवाड़ा में उमड़ी आस्था को देखते हुए कहा कि 42 डिग्री तापमान के बावजूद जिस तरह श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं, वह किसी कुंभ से कम नहीं लगता। उन्होंने आयोजन से जुड़े संतों और समिति के पदाधिकारियों की सराहना करते हुए कहा कि इतनी बड़ी कथा का आयोजन करना आसान नहीं होता।

अहंकार छोड़कर ही शिव की प्राप्ति संभव
उन्होंने श्रद्धालुओं को संदेश दिया कि भगवान शिव तक पहुंचने के लिए अहंकार का त्याग जरूरी है। सादगी, विश्वास और भक्ति ही शिव तक पहुंचने का मार्ग है। “मैं और मेरा” की भावना छोड़कर ही जीवन में सच्ची शांति मिल सकती है।
भजनों पर झूमे श्रद्धालु
कथा के दौरान जब ‘काशी वाले ने मालामाल कर दिया’ जैसे भजन गूंजे तो हजारों श्रद्धालु भक्ति में डूबकर झूम उठे। पांडाल के भीतर और बाहर हर ओर भक्ति का माहौल दिखाई दिया।

कथा से पहले हुआ हनुमान चालीसा पाठ
प्रतिदिन की तरह कथा से पूर्व श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ किया और सुख-शांति की कामना की। आयोजन समिति द्वारा श्रद्धालुओं के लिए पेयजल, छाया और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं लगातार बढ़ाई जा रही हैं।

सजीव झांकियों ने बढ़ाया आकर्षण
कथा के दौरान भगवान शिव-पार्वती और गणेश सहित विभिन्न झांकियों का मंचन किया जा रहा है, जो श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।
श्रद्धालुओं से अपील
रविवार को संभावित भीड़ को देखते हुए आयोजन समिति ने श्रद्धालुओं से समय से पहले पहुंचने की अपील की है। साथ ही कीमती सामान और आभूषण पहनकर न आने तथा अपने सामान का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी गई है।
कथा का आयोजन 14 अप्रैल तक प्रतिदिन दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक जारी रहेगा।
