भीलवाड़ा। संगम विश्वविद्यालय, भीलवाड़ा में “Strengthening Societal Security: Prevention of Digital Arrest and Cybercrime Threats” विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के प्रथम दिवस विशेषज्ञों ने डिजिटल अरेस्ट, साइबर अपराध, साइबर सुरक्षा और डिजिटल युग में सामाजिक सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श किया।
सम्मेलन का उद्देश्य विद्यार्थियों, शोधार्थियों, शिक्षकों और विशेषज्ञों के बीच साइबर अपराधों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ डिजिटल सुरक्षा से जुड़े समसामयिक विषयों पर अकादमिक संवाद को बढ़ावा देना रहा।
उद्घाटन समारोह में राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय, कोटा के कुलपति प्रो. निमित रंजन चौधरी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हेमंत नोगिया, संगम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. करुणेश सक्सेना, रजिस्ट्रार डॉ. आलोक कुमार, बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट की सदस्या पलक मुदानी सहित विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी मौजूद रहे।
सम्मेलन निदेशक प्रो. डॉ. विभोर पालीवाल ने कहा कि वर्तमान डिजिटल युग में साइबर अपराध केवल तकनीकी चुनौती नहीं रह गया है, बल्कि यह सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बन चुका है।
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए प्रो. निमित रंजन चौधरी ने मानव विकास से लेकर वर्तमान डिजिटल युग तक हुए बदलावों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि तकनीकी प्रगति ने जीवन को व्यापक रूप से प्रभावित किया है, लेकिन डिजिटल सुविधाओं के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर सुरक्षा के प्रति सजगता और जिम्मेदारी भी आवश्यक है।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हेमंत नोगिया ने साइबर सुरक्षा और साइबर अपराधों से बचाव के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने विद्यार्थियों और आमजन को ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचाव, साइबर सुरक्षा के सामान्य नियमों तथा डिजिटल अरेस्ट जैसी घटनाओं के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में बताया।
संगम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. करुणेश सक्सेना ने डिजिटल अरेस्ट और साइबर अपराधों की गंभीरता पर प्रकाश डालते हुए अपने परिचितों एवं परिवार से जुड़े वास्तविक जीवन के अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि डिजिटल सुविधाओं का लाभ उठाने के साथ प्रत्येक व्यक्ति के लिए साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक और सतर्क रहना जरूरी है।
रजिस्ट्रार डॉ. आलोक कुमार ने सम्मेलन के विषय की समकालीन प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ऐसे अकादमिक आयोजन विद्यार्थियों और युवाओं को बदलते डिजिटल परिवेश की चुनौतियों को समझने तथा उनके प्रति सजग रहने का अवसर प्रदान करते हैं।
सम्मेलन संयोजक डॉ. सुरभि बिरला ने कहा कि डिजिटल तकनीक के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराधों के स्वरूप में भी लगातार बदलाव हो रहा है। युवाओं और आमजन को साइबर खतरों की पहचान, बचाव के उपायों और डिजिटल अरेस्ट जैसी घटनाओं के प्रति जागरूक करना समय की आवश्यकता है।
प्रथम दिवस दो तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। तकनीकी सत्र-I में डॉ. रवि मुंद्रा ने मुख्य वक्ता के रूप में साइबर सुरक्षा से जुड़े विषयों पर विचार रखे, जबकि डॉ. अविनाश पंवार ने सत्र की अध्यक्षता की। इस दौरान विद्यार्थियों और शोधार्थियों ने साइबर सुरक्षा, डिजिटल अरेस्ट और साइबर अपराधों से संबंधित शोध-पत्र प्रस्तुत किए। शोध-पत्रों पर विशेषज्ञों ने प्रश्नोत्तर और सार्थक चर्चा की।
तकनीकी सत्र-II में प्रो. मुकेश कुमार शर्मा ने विद्यार्थियों को साइबर सुरक्षा के महत्व, साइबर अपराधों से बचाव के उपायों और डिजिटल अरेस्ट के बढ़ते खतरे के प्रति जागरूक किया। उन्होंने विद्यार्थियों को सतर्क और जिम्मेदार डिजिटल नागरिक बनने के लिए प्रेरित किया।
दोनों तकनीकी सत्रों में शोधार्थियों के शोध-पत्रों के माध्यम से साइबर अपराधों की बदलती प्रकृति, डिजिटल सुरक्षा तथा व्यक्तिगत और सामाजिक स्तर पर साइबर अपराधों से बचाव के उपायों पर विस्तृत चर्चा हुई।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. नेहा सभरवाल एवं डॉ. कल्पना नेबिनानी ने किया। सम्मेलन की ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ. आकांक्षा मारू ने आयोजन के समन्वय एवं व्यवस्थाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सम्मेलन के सफल आयोजन में विश्वविद्यालय के फैकल्टी सदस्यों की सक्रिय भागीदारी रही।
