माण्डल में खरीफ पूर्व कृषक गोष्ठी आयोजित, किसानों को जैविक खेती अपनाने का दिया संदेश

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‘धरती माता बचाओ’ अभियान के तहत रासायनिक उर्वरकों का उपयोग कम करने की दिलाई शपथ

भीलवाड़ा, 11 जून। आत्मा योजना एवं कृषि विभाग के संयुक्त तत्वावधान में गुरुवार को माण्डल तालाब की पाल पर खरीफ सीजन पूर्व कृषक गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया और जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। कार्यक्रम के दौरान “धरती माता बचाओ” अभियान के तहत किसानों को रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों का उपयोग कम करने तथा पर्यावरण संरक्षण का संकल्प भी दिलाया गया।

गोष्ठी को संबोधित करते हुए सहायक निदेशक कृषि विस्तार डॉ. धीरेन्द्र सिंह राठौड़ ने कहा कि परम्परागत कृषि विकास योजना किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी साबित हो रही है। उन्होंने बताया कि रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरा शक्ति लगातार कमजोर हो रही है तथा जैविक तत्वों की कमी बढ़ती जा रही है। इसका सीधा प्रभाव कृषि उत्पादन के साथ-साथ मानव स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है।

उन्होंने किसानों से लाभदायक कीटों की पहचान कर उनके संरक्षण, फेरोमोन ट्रैप के अधिक उपयोग तथा रासायनिक कीटनाशकों के स्थान पर जैविक कीटनाशकों को अपनाने का आग्रह किया।

कृषि अधिकारी कजोड़ मल गुर्जर ने कहा कि वर्तमान समय में जैविक खेती की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। उन्होंने बताया कि देशी गाय के गोबर, गोमूत्र, नीम तथा अन्य स्थानीय संसाधनों के उपयोग से खेती की लागत को कम किया जा सकता है। साथ ही पर्यावरण अनुकूल और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाकर किसानों की आय में भी वृद्धि की जा सकती है।

आत्मा योजना की उप परियोजना निदेशक मीना कुमारी ने किसानों को योजना की विभिन्न गतिविधियों की जानकारी देते हुए बताया कि आत्मा योजना के अंतर्गत कृषक प्रशिक्षण, कृषक भ्रमण एवं तकनीकी मार्गदर्शन कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाते हैं। इन कार्यक्रमों का लाभ उठाकर किसान आधुनिक एवं लाभकारी कृषि तकनीकों को अपनाकर अपनी आय बढ़ा सकते हैं।

एग्री क्लिनिक एवं मृदा परीक्षण प्रयोगशाला के कृषि अनुसंधान अधिकारी जीतराम चौधरी ने जैविक खेती की विभिन्न तकनीकों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बीजामृत, जीवामृत, घन जीवामृत, नीमास्त्र, दशपर्णी अर्क, बहुफसली प्रणाली, बायोमास आधारित मल्चिंग, पारंपरिक बीजों के उपयोग तथा खेत में बफर जोन विकसित करने जैसी तकनीकों को अपनाने की सलाह दी।

उन्होंने कहा कि मृदा परीक्षण के आधार पर संतुलित उर्वरकों का उपयोग कर खेती की लागत कम की जा सकती है और किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है।

गोष्ठी में सहायक कृषि अधिकारी रतनलाल शर्मा, पंकज पालीवाल, कुलदीप सैन सहित अनेक प्रगतिशील किसान उपस्थित रहे।

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