संसार में विरले होते है जो बिना नाम व फोटो की चाह के भक्ति व सेवा कार्य करते है
माणिक्यनगर रामद्वारा धाम में दैनिक चातुर्मासिक सत्संग
भीलवाड़ा, 27 अगस्त। जीवन के विभिन्न कार्यो में सहयोग की अपेक्षा हो सकती है लेकिन प्रभु नाम भक्ति में किसी तरह के सहयोग की जरूरत नहीं होती है। राम नाम सुनना ओर लेना सौभाग्य है। अनन्य नाम श्रद्धा से भक्ति करने वाला संत का भी संत होता है।
भक्ति में सब कुछ समर्पित कर देने वाले ऐसे भक्त का उद्धार परमात्मा अवश्य करते है।
ये विचार अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय शाहपुरा के पीठाघीश्वर जगतगुरू आचार्य स्वामी श्रीरामदयालजी महाराज ने गुरूवार को ‘‘विश्व शांति कल्याण’’ चातुर्मास के तहत दैनिक सत्संग में नाम भक्ति की महिमा की व्याख्या करते हुए व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि जीवन का कोई न कोई लक्ष्य तय अवश्य होना चाहिए। नामानुराग से बढ़कर कोई भक्ति ओर तत्व नहीं हो सकता।
सेवा में भी यदि अनन्य भाव है तो वह श्रेष्ठ है दिखावे के लिए सेवा नहीं होनी चाहिए। संसार में विरले लोगे होते है जो बिना नाम व फोटो की चाह के भक्ति व सेवा के कार्य करते है।
श्रीमहाराज की कृपा से कुछ भक्त ऐसे होते है जो सेवा में अग्रणी होते पर नाम के मोहताज नहीं होते है।
आचार्यश्री ने कहा कि जीवन में जिसने नाम तत्व ओर नाम मर्मज्ञ को जान लिया उसकी भक्ति सार्थक हो जाती हैै। भगवान नाम की महत्ता बढ़ाने के लिए भक्त के माध्यम से अद्भुत लीला करते है। शून्य किसी अंक के साथ लग जाए तो उसकी कीमत कई गुणा हो जाती पर शून्य के साथ जुड़े अंक हटा दिए जाए तो वह जीरों हो जाता उसकी कोई कीमत नहीं रह जाती। इसलिए कभी भी अपने को नगण्य नहीं समझना चाहिए।
उन्होंने कहा कि संसार में राम नाम के बिना सब बेकार है। नाम के बिना संसार में कुछ नहीं है। संसार में नाम का सुख मिलता है।
आचार्य रामदयालजी महाराज ने कहा कि संसार में सब काम कर लो पर भगवान का भजन नहीं किया तो सब कार्य निष्फल हो जाएंगे। जीवन में व्यर्थ की चिंता नहीं करनी चाहिए। महापुरूषों ने नाम साधना में ही सब कुछ निहित कर लिया है ओर नाम साधना पर बहुत जोर दिया है। नाम के बिना संसार में कोई है ही नहीं।
आचार्यश्री से पूर्व अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय के प्रखर वक्ता संत मनोरथरामजी आलोट ने मानस पर प्रवचन दिया। प्रवचन के विश्राम पर श्रद्धालुओं द्वारा आचार्यश्री रामदयालजी महाराज की आरती की गई। सत्संग में भीलवाड़ा सहित विभिन्न स्थानों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। चातुर्मास में शुक्रवार को सनातन संस्कृति के विराट पर्व रक्षा बंधन पर सुबह सुबह 9 से 10 बजे तक विशेष प्रवचन होंगे। प्रतिदिन रामधुनी के साथ सुबह 8.30 से 9 बजे तक वाणीजी का पाठ हो रहा है। सूर्यास्त के समय संध्या आरती एवं रामस्नेही सम्प्रदाय के युवा संत रामजस जी ईडर द्वारा भक्तमाल की कथा में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे है।
