राष्ट्रीय खेल दिवस पर लाडो स्पोर्ट्स एकेडमी की दो दिवसीय बॉक्सिंग प्रतियोगिता का रोमांचक समापन
भीलवाड़ा । लाडो सेवा फाउंडेशन अध्यक्ष अधिवक्ता लक्ष्मण सिंह राठौड़ ने बताया कि “बेटियां जब मैदान में उतरती हैं तो सिर्फ मुकाबला नहीं करतीं, बल्कि अपनी पहचान और अपने सपनों के लिए लड़ती हैं।” इसी जज्बे और आत्मविश्वास की शानदार तस्वीर बापूनगर स्थित शहीद राजगुरु खेल मैदान में देखने को मिली, जहां राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर लाडो सेवा फाउंडेशन द्वारा संचालित लाडो स्पोर्ट्स एकेडमी की ओर से आयोजित दो दिवसीय खेल प्रतियोगिता के तहत बालिकाओं की बॉक्सिंग स्पर्धा के सेमीफाइनल और फाइनल मुकाबले खेले गए।
विभिन्न भार वर्गों में आयोजित बॉक्सिंग मुकाबलों में बालिकाओं ने पूरे जोश, जुनून और आत्मविश्वास के साथ रिंग में उतरकर अपने खेल कौशल का शानदार प्रदर्शन किया। मुकाबले जैसे-जैसे आगे बढ़े, खिलाड़ियों के पंच, फुटवर्क और तकनीकी दक्षता ने दर्शकों में रोमांच पैदा कर दिया। जीत के लिए प्रत्येक खिलाड़ी ने अपना पूरा दमखम लगाया और खेल भावना के साथ प्रतिद्वंद्वी का सामना किया।
फाइनल मुकाबलों में खिलाड़ियों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली। किसी के चेहरे पर जीत का उत्साह था तो किसी ने हार के बावजूद अपने शानदार प्रदर्शन से सभी का दिल जीत लिया। खिलाड़ियों ने साबित कर दिया कि बेटियों को अवसर मिले तो वे केवल खेल के मैदान में उतरती ही नहीं, बल्कि अपनी मेहनत और हौसले से जीत का इतिहास भी लिख सकती हैं।
“बेटियों के हाथों में मुक्के हैं, लेकिन आंखों में सपने हैं”
लाडो स्पोर्ट्स एकेडमी का उद्देश्य बालिकाओं को खेलों के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए सुरक्षित, सकारात्मक और प्रोत्साहनपूर्ण मंच उपलब्ध कराना है। संस्था का मानना है कि खेल केवल पदक जीतने का माध्यम नहीं, बल्कि बालिकाओं में आत्मविश्वास, अनुशासन, निर्णय क्षमता, नेतृत्व और आत्मनिर्भरता विकसित करने का सशक्त माध्यम है।
इस आयोजन ने यह संदेश भी दिया कि जिस बेटी को समाज कभी कमजोर समझता है, वही बेटी खेल के मैदान में अपने मजबूत इरादों से दुनिया को अपनी ताकत का एहसास करा सकती है। जरूरत सिर्फ उसे अवसर देने और उसके हौसले को उड़ान देने की है।
राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर आयोजित इस प्रतियोगिता में इच्छा, निशा, संध्या स्वाइन, मीनू कोली, गायत्री, खुशबू बंसल, सावित्री, वंशिका, निशा वर्मा, भावना निर्वाण,कविता ,खुशी,कोमल ,मुस्कान, लक्ष्मी, श्रद्धा, खुशी जाट,तमना,सुमन,माधवी, आदि बालिकाओं की प्रतिभा और उत्साह ने साबित किया कि भीलवाड़ा में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता है तो ऐसी प्रतिभाओं को लगातार अवसर, उचित प्रशिक्षण और सही मंच उपलब्ध कराने की।
लाडो सेवा फाउंडेशन द्वारा बालिकाओं को खेलों से जोड़ने और उन्हें आगे बढ़ाने के प्रयास को उपस्थित लोगों ने सराहा तथा विजेता एवं प्रतिभागी खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया।
