इको-फ्रेंडली गणेश कार्यशाला में 15 सखियों ने बच्चों के साथ मिलकर बनाई गणेश प्रतिमाएं, भक्ति और पर्यावरण संरक्षण का दिखा अनूठा संगम
भीलवाड़ा। गणेश उत्सव की तैयारियों के बीच जहां बाजारों में तैयार गणेश प्रतिमाओं की खरीदारी का दौर चल रहा है, वहीं सखी स्टूडियो और डिवाइन ऊर्जा ग्रुप की सखियों ने अपने हाथों से गणेश प्रतिमाएं गढ़कर उत्सव को प्रकृति से जोड़ने की अनूठी पहल की।
निजी रेस्टोरेंट में आयोजित इको-फ्रेंडली गणेश कार्यशाला में 15 प्रतिभागियों ने बच्चों के साथ मिलकर मिट्टी से गणेश प्रतिमाएं तैयार कीं। कार्यशाला में प्रतिभागियों ने मिट्टी को अलग-अलग आकार देते हुए अपनी कल्पना और भावनाओं को प्रतिमाओं में उकेरा। देखते ही देखते साधारण मिट्टी आस्था के प्रतीक भगवान गणेश के स्वरूप में ढल गई।
भक्ति के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश
कार्यशाला में गणेश प्रतिमा निर्माण के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी प्रमुख रहा। आयोजकों ने बताया कि मिट्टी से बनी प्रतिमाओं के माध्यम से गणेश उत्सव को पर्यावरण के अनुकूल बनाने के प्रति लोगों को जागरूक किया जा सकता है।
भक्ति, रचनात्मकता और पर्यावरण संरक्षण के इस संगम ने कार्यक्रम को खास बना दिया। अपनी मेहनत से तैयार की गई गणेश प्रतिमाओं को देखकर प्रतिभागियों के चेहरों पर खुशी साफ नजर आई।
उत्कृष्ट प्रतिमाओं को किया सम्मानित
कार्यशाला में तैयार की गई गणेश प्रतिमाओं में उत्कृष्ट रचनात्मकता के लिए तीन प्रतिभागियों को विशेष पुरस्कार प्रदान किए गए। प्रथम पुरस्कार रेखा शर्मा, द्वितीय पुरस्कार चेतना जागेटिया और तृतीय पुरस्कार पायल अजमेरा को मिला।
प्रतिमाओं के मूल्यांकन के लिए श्रीमती नीलम काबरा एवं श्रीमती रिंकू अग्रवाल को निर्णायक के रूप में आमंत्रित किया गया।
सखियों ने लिया भाग
कार्यक्रम में रेखा लढा, चेतना जागेटिया, रेखा शर्मा, सरोज लढा, पायल अजमेरा, शिवानी समदानी, सोनिका जागेटिया, सोनल सोमानी, अंजली बांगड़, सोनाली अजमेरा, आरती तोषनीवाल, रेनू समदानी एवं सोनल दरगड़ सहित सखी स्टूडियो की सखियों की उपस्थिति रही।
प्राकृतिक विसर्जन को दिया बढ़ावा
कार्यशाला का उद्देश्य गणेश उत्सव के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा। प्रतिभागियों ने संदेश दिया कि मिट्टी के गणेश बनाकर और उनका प्राकृतिक तरीके से विसर्जन कर उत्सव की खुशी के साथ प्रकृति को भी सुरक्षित रखा जा सकता है।
इस पहल के जरिए आयोजकों ने लोगों से अपील की कि गणेश उत्सव को आस्था के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए इको-फ्रेंडली प्रतिमाओं को अपनाएं और प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाएं।
