भीलवाड़ा, 18 मई। जिले में विधिक माप विज्ञान विभाग द्वारा पेट्रोल पम्पों पर किए जा रहे औचक निरीक्षणों को लेकर पेट्रोल पम्प संचालकों ने कई आपत्तियां जताई हैं। इस संबंध में मुख्यमंत्री राजस्थान सरकार के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर निरीक्षण प्रक्रिया में सुधार की मांग की गई।
ज्ञापन में कहा गया कि उपभोक्ता हित में हो रहे निरीक्षण स्वागत योग्य हैं, लेकिन कई मामलों में तकनीकी पहलुओं को नजरअंदाज कर डीलर्स को अनावश्यक रूप से दोषी ठहराया जा रहा है। पेट्रोल पम्प संचालकों का कहना है कि आधुनिक डिजिटल मशीनों में यदि सील अक्षुण्ण हो तथा “के-फैक्टर” में कोई बदलाव नहीं पाया जाए, तो यह स्पष्ट माना जाना चाहिए कि मशीन से किसी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं हुई है। ऐसी स्थिति में यदि ईंधन वितरण में अनुज्ञेय सीमा से अधिक अंतर पाया जाता है तो वह मशीन की तकनीकी त्रुटि या अत्यधिक गर्मी के कारण हो सकता है।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि विधिक माप विज्ञान विभाग द्वारा 5 लीटर माप में 25 मिली तक की अनुज्ञेय सीमा निर्धारित है, लेकिन निरीक्षण के दौरान मशीन की गणना प्रणाली 10 मिली के गुणक में कार्य करती है। ऐसे में 21 मिली से 30 मिली तक का अंतर 30 मिली के रूप में दर्शाया जाता है, जिससे वास्तविक मूल्यांकन प्रभावित होता है और डीलर सही होने के बावजूद दोषी करार दिए जाने की आशंका रहती है।
पेट्रोल पम्प संचालकों ने यह भी आपत्ति जताई कि बिना किसी छेड़छाड़ के केवल वितरण अंतर मिलने पर डीलर्स के नाम सार्वजनिक किए जा रहे हैं, जिससे उनकी प्रतिष्ठा प्रभावित हो रही है। ज्ञापन में मांग की गई कि जिन मामलों में मशीनों की सील सुरक्षित हो और तकनीकी छेड़छाड़ प्रमाणित न हो, वहां केवल पुनर्सत्यापन की कार्रवाई की जाए तथा मीडिया में नाम सार्वजनिक करने से बचा जाए।
ज्ञापन के माध्यम से राज्य सरकार से मांग की गई कि विधिक माप विज्ञान विभाग को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि नियमानुसार निष्पक्ष निरीक्षण हो सके और पेट्रोल पम्प व्यवसायी उपभोक्ताओं को बेहतर सेवा प्रदान कर सकें।
