हरिशेवा उदासीन आश्रम में ‘रुक्मिणी विवाह महोत्सव’ में श्रद्धालु भक्ति रस में हुए सराबोर

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सच्ची श्रद्धा और समर्पण कभी व्यर्थ नहीं जाता : स्वामी अशोकानंद जी महाराज

श्रीमद्भागवत कथा का विश्राम 7 जून को

भीलवाड़ा। सनातन सेवा समिति, हरिशेवा उदासीन आश्रम सनातन मंदिर एवं महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम जी उदासीन महाराज के सानिध्य में पुरुषोत्तम मास के उपलक्ष्य में आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिवस भगवान श्रीकृष्ण एवं माता रुक्मिणी के दिव्य विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया गया। कथा के दौरान श्रद्धालु भक्ति, उल्लास और मंगलगीतों के बीच रुक्मिणी विवाह महोत्सव में सराबोर हो गए।

कथाव्यास पूज्य स्वामी अशोकानंद जी महाराज (भक्ति धाम आश्रम, नर्मदा तट, जबलपुर) ने उद्धव-गोपी संवाद से कथा का प्रारंभ करते हुए गोपी प्रेम की महिमा का वर्णन किया। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के मथुरा गमन, अक्रूर जी के आगमन, कंस वध तथा श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह की दिव्य लीलाओं का रसपूर्ण वर्णन किया।

स्वामी अशोकानंद जी महाराज ने कहा कि गोपियों का भगवान के प्रति निष्काम, निष्कपट एवं पूर्ण समर्पण भाव भक्ति का सर्वोच्च आदर्श है। उन्होंने श्रीमद्भागवत के प्रसिद्ध श्लोक “आसामहो चरणरेणुजुषामहं स्यां वृन्दावने किमपि गुल्मलतौषधीनाम्…” का भावार्थ समझाते हुए कहा कि उद्धव जी स्वयं व्रज गोपियों की अनन्य भक्ति से अभिभूत होकर उनके चरणों की धूलि प्राप्त करने की कामना करते हैं। गोपियों ने लोक-लाज, कुल-मर्यादा और सांसारिक बंधनों से ऊपर उठकर भगवान श्रीकृष्ण के परम प्रेम को प्राप्त किया, जिसकी खोज वेद एवं उपनिषद भी करते हैं।

उन्होंने कहा कि माता रुक्मिणी का भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अटूट विश्वास, प्रेम और समर्पण भक्त एवं भगवान के दिव्य संबंध का अनुपम उदाहरण है। जब रुक्मिणी जी ने अपने हृदय में भगवान श्रीकृष्ण को पति रूप में स्वीकार कर लिया, तब भगवान स्वयं उनकी रक्षा और सम्मान के लिए पहुंचे। यह प्रसंग बताता है कि सच्ची श्रद्धा और समर्पण कभी व्यर्थ नहीं जाते।

कथा के दौरान श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह प्रसंग पर श्रद्धालुओं ने भजनों, मंगलगीतों और जयघोषों के साथ उत्सव मनाया। पूरा वातावरण “राधे-श्याम” एवं “जय श्रीकृष्ण” के उद्घोषों से गुंजायमान हो उठा।

पुरुषोत्तम मास महोत्सव के अंतर्गत प्रतिदिन विष्णु यज्ञ, रुद्राभिषेक, संकीर्तन, गंगा आरती एवं विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जा रहा है। शनिवार को आयोजित विष्णु यज्ञ में गोपाल-सुनीता नानकानी एवं सुरेश-वंदना आहुजा ने सपत्नीक आहुतियां अर्पित कर पुण्य लाभ अर्जित किया तथा भगवान महादेव का रुद्राभिषेक किया।

आश्रम के संत मायाराम ने बताया कि रविवार, 7 जून को श्रीमद्भागवत कथा का समापन एवं विश्राम होगा। विशेष व्यवस्था के तहत कथा दोपहर 12 बजे से अपराह्न 3 बजे तक आयोजित की जाएगी। इसके पश्चात 8 जून से 14 जून तक प्रतिदिन दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक शिव महापुराण कथा का आयोजन होगा। 15 जून को विभिन्न धार्मिक आयोजनों के साथ पुरुषोत्तम मास महोत्सव का समापन किया जाएगा।

इस अवसर पर संत गोविन्दराम, संत राजाराम, संत ईशानराम, संत सुयज्ञराम सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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