भीलवाड़ा में राष्ट्रीय लोक अदालत में 2.67 लाख से अधिक प्रकरणों का निस्तारण, 40.47 करोड़ रुपये के अवार्ड पारित

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लंबे समय से चल रहे विवाद राजीनामे से समाप्त, 10 साल पुराने 16 मामलों का भी हुआ निस्तारण

भीलवाड़ा। राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार शनिवार को इस वर्ष की तृतीय राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। लोक अदालत में जिलेभर में कुल 2,67,103 प्रकरणों का आपसी सहमति और राजीनामे के आधार पर निस्तारण किया गया। इनमें मुकदमा पूर्व स्तर के 2,47,936 और न्यायालयों में लंबित 19,167 प्रकरण शामिल हैं। इन मामलों में कुल 40 करोड़ 47 लाख 28 हजार 723 रुपये की अवार्ड राशि पारित की गई।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव रश्मि आर्य ने बताया कि जिला एवं सेशन न्यायाधीश अभय जैन के निर्देशन और मार्गदर्शन में आयोजित लोक अदालत में दीवानी, फौजदारी, पारिवारिक विवाद, मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी), चेक अनादरण, श्रम विवाद, बैंक रिकवरी, उपभोक्ता और राजस्व सहित विभिन्न प्रकार के समझौता योग्य मामले रखे गए।

दीप प्रज्ज्वलन कर किया शुभारंभ

भीलवाड़ा मुख्यालय पर राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारंभ अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश पवन कुमार काला, अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश नगेन्द्र सिंह, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव रश्मि आर्य, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट देवांगिनी औदिच्य, न्यायिक मजिस्ट्रेट हर्षित हाड़ा, बार अध्यक्ष उम्मेद सिंह राठौड़, लोक अदालत सदस्य शांति लाल जैन, राजेन्द्र कचैलिया और पंकज दाधीच ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।

21 बेंचों के माध्यम से हुआ निस्तारण

जिले में राष्ट्रीय लोक अदालत के लिए 21 बेंचों का गठन किया गया। न्यायिक अधिकारियों, राजस्व अधिकारियों और अनुभवी अधिवक्ताओं ने पक्षकारों को समझाइश कर आपसी सहमति से विवादों का निस्तारण कराया। न्यायालयों में लंबित 23,505 प्रकरण चिन्हित किए गए थे, जिनमें से 19,167 मामलों का निस्तारण हुआ। इन मामलों में 37 करोड़ 50 लाख 786 रुपये के अवार्ड पारित किए गए।

लोक अदालत में 10 साल पुराने 16 प्रकरणों का भी राजीनामे के माध्यम से निस्तारण किया गया। इससे लंबे समय से विवादों में उलझे पक्षकारों को राहत मिली और मामलों का अंतिम रूप से निपटारा संभव हुआ।

बैंक, बिजली और बीएसएनएल के मामलों में मिली राहत

मुकदमा पूर्व स्तर पर बैंक, बीएसएनएल, बिजली और अन्य वित्तीय संस्थानों से जुड़े रिकवरी मामलों का भी निस्तारण किया गया। कई मामलों में मूल राशि से कम पर राजीनामा कराया गया, जिससे संबंधित संस्थानों और उपभोक्ताओं दोनों को लाभ मिला। बिजली बिलों से जुड़े मामलों में विद्युत विभाग की ओर से छूट और अन्य राहत दिए जाने से उपभोक्ताओं को फायदा हुआ।

लोक अदालत की प्रक्रिया में आपसी समझाइश और सहमति के आधार पर मुकदमा दायर होने से पहले ही विवाद समाप्त किए गए। त्वरित और कम खर्च में विवादों का समाधान होने से पक्षकारों को राहत मिली।

सड़क दुर्घटना के मामले में 86 लाख रुपये का अवार्ड

राष्ट्रीय लोक अदालत में मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण संख्या-1, भीलवाड़ा में लंबित शोभालाल बनाम गो डिजिट जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड एवं अन्य के मामले में 86 लाख रुपये का राजीनामा हुआ।

प्रकरण में सड़क दुर्घटना में गंभीर चोटें आने के कारण परिवादी शोभालाल कोमा में चले गए थे। इसके बाद उनके परिवारजनों ने मुआवजे के लिए दावा प्रस्तुत किया था। राष्ट्रीय लोक अदालत की बेंच संख्या-2 के अध्यक्ष न्यायाधीश पवन कुमार काला और सदस्य राजेश सामरिया के समक्ष परिवादी की ओर से अधिवक्ता श्रवण लाल कुम्हार तथा बीमा कंपनी की ओर से अधिवक्ता अंशुल बंसल ने पैरवी की। दोनों पक्षों के बीच सहमति बनने पर 86 लाख रुपये की राशि में राजीनामा कर अवार्ड पारित किया गया।

सहयोग के लिए जताया आभार

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव रश्मि आर्य ने राष्ट्रीय लोक अदालत को सफल बनाने में सहयोग देने वाले समस्त न्यायिक अधिकारियों, जिला कलेक्टर, नोडल अधिकारी एवं अतिरिक्त जिला कलेक्टर (प्रशासन), पुलिस प्रशासन, बार अध्यक्ष उम्मेद सिंह राठौड़, अधिवक्ताओं और न्यायिक कर्मचारियों का आभार व्यक्त किया।

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