नवधा भक्ति मानव जीवन को बनाती है सात्विक और ईश्वरमय : महामंडलेश्वर स्वामी जगदीश दास उदासीन

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राम-भरत मिलाप प्रसंग सुन भावुक हुए श्रद्धालु, जय श्रीराम के जयघोष से गूंजा आश्रम

भीलवाड़ा।
सनातन सेवा समिति के तत्वावधान एवं महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन के सानिध्य में हरि शेवा उदासीन आश्रम सनातन मंदिर में आयोजित पुरुषोत्तम माह महोत्सव के अंतर्गत चल रही नौ दिवसीय श्रीराम कथा के आठवें दिन श्रद्धा, भक्ति और भावनाओं का अद्भुत संगम देखने को मिला। हरिद्वार से पधारे महामंडलेश्वर स्वामी जगदीश दास उदासीन ने भगवान श्रीराम के वनवास काल के राम-भरत मिलाप प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया।

कथा के दौरान प्रस्तुत भजनों और प्रवचनों ने श्रद्धालुओं को भक्ति रस में डुबो दिया। पूरा सभागार “जय श्रीराम” के उद्घोष से गूंज उठा।

महामंडलेश्वर स्वामी जगदीश दास ने कहा कि भगवान श्रीराम मर्यादा, विनम्रता और आदर्श जीवन के प्रतीक हैं। उन्होंने बताया कि परमात्मा सर्वज्ञ होने के बावजूद अपनी लीलाओं में दूसरों को सम्मान और श्रेय देकर समाज को विनम्रता का संदेश देते हैं। वनवास प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम ने महर्षि भारद्वाज और महर्षि वाल्मीकि से मार्गदर्शन प्राप्त कर मानव समाज को बड़ों और संतों के सम्मान की प्रेरणा दी।

स्वामी जी ने चित्रकूट की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि यह स्थान तप, त्याग और भक्ति की भूमि है। कथा में राम-भरत मिलाप का मार्मिक प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने बताया कि भरत जी ने भगवान श्रीराम से अयोध्या लौटने का आग्रह किया, लेकिन श्रीराम ने पिता के वचन और धर्म पालन को सर्वोपरि मानते हुए वनवास पूरा करने का संकल्प निभाया। इस प्रसंग ने श्रद्धालुओं को भावुक कर दिया।

महामंडलेश्वर ने सती अनुसुइया प्रसंग का वर्णन करते हुए नारी धर्म, पतिव्रत और आदर्श गृहस्थ जीवन के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी परिवार के संस्कारों और मर्यादा की आधारशिला मानी गई है।

कथा के दौरान नवधा भक्ति का भी विस्तार से वर्णन किया गया। स्वामी जगदीश दास ने कहा कि भगवान की भक्ति के नौ स्वरूप मनुष्य के जीवन को सरल, सात्विक और ईश्वरमय बनाते हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से भक्ति, सेवा, सत्संग और नामस्मरण को जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर धर्मलाभ प्राप्त किया। इस दौरान विष्णु यज्ञ और रुद्राभिषेक में श्रद्धालुओं ने विशेष आहुतियां देकर पूजा-अर्चना की।

आश्रम परिसर में पुरुषोत्तम माह महोत्सव के तहत प्रतिदिन विष्णु यज्ञ, रुद्राभिषेक, गंगा आरती, हरिनाम संकीर्तन और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन श्रद्धा और उत्साह के साथ जारी है।

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