विप्र पूजन, विष्णु यज्ञ पूर्णाहुति, रुद्राभिषेक एवं भव्य गंगा आरती के साथ सम्पन्न हुए मासव्यापी धार्मिक आयोजन
भीलवाड़ा, 15 जून। हरि शेवा उदासीन आश्रम, सनातन मंदिर में पुरुषोत्तम मास के अवसर पर एक माह से संचालित धार्मिक, आध्यात्मिक एवं सेवा कार्यों का भव्य समापन सोमवार को संत समागम सम्मेलन, विष्णु यज्ञ पूर्णाहुति, रुद्राभिषेक, विप्र पूजन एवं भव्य गंगा आरती के साथ श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में देशभर से पधारे संत-महात्माओं, श्रद्धालुओं एवं गणमान्य नागरिकों ने भाग लेकर धर्मलाभ अर्जित किया।

प्रातःकाल गंगा, नर्मदा एवं पुष्कर के पवित्र जल से निर्मित सरोवर में संत-महात्माओं ने स्नान एवं पवित्र डुबकी लगाकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसके पश्चात आचार्य पंडित रोशन शास्त्री एवं उपाचार्य पंडित सत्यनारायण शर्मा के सानिध्य में वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य विष्णु यज्ञ सम्पन्न हुआ तथा अभिजीत मुहूर्त में यज्ञ की पूर्णाहुति की गई। इस अवसर पर हरि सिद्धेश्वर महादेव का वैदिक विधि-विधान से रुद्राभिषेक भी संपन्न कराया गया।
यज्ञ पूर्णाहुति के दौरान 33 कोटि देवी-देवताओं का पूजन, अमावस्या तर्पण, छप्पन भोग अर्पण एवं विभिन्न वैदिक अनुष्ठान सम्पन्न हुए। श्रद्धालुओं ने भगवान से सुख-समृद्धि, शांति और विश्व कल्याण की प्रार्थना की।
अपराह्न में आयोजित संत समागम सम्मेलन को संबोधित करते हुए आश्रम के महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम जी उदासीन महाराज ने कहा कि जहां संतों का संग होता है, वहीं वास्तविक सत्संग का जन्म होता है। उन्होंने सेवा, सिमरन और रामनाम को मानव जीवन की सबसे बड़ी साधना बताते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को परमात्मा का स्मरण करते हुए समाज और राष्ट्र की सेवा में निरंतर लगे रहना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पुरुषोत्तम मास के दौरान देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी श्रद्धालु आश्रम पहुंचे और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेकर पुण्य लाभ अर्जित किया। उन्होंने श्रद्धालुओं से रामनाम का नियमित स्मरण करने का आह्वान करते हुए कहा कि सनातन संस्कृति में “राम-राम” केवल अभिवादन नहीं बल्कि समाज को जोड़ने का सशक्त माध्यम है।
स्वामी हंसराम जी महाराज ने संत सेवा, गौ सेवा, जीव सेवा, पर्यावरण संरक्षण, संस्कृति संवर्धन तथा माता-पिता और पूर्वजों की सेवा को जीवन का महत्वपूर्ण धर्म बताते हुए सभी से सेवा का संकल्प लेने का आग्रह किया।
कार्यक्रम में काशी के प्रखर वक्ता डॉ. स्वामी निर्मल दास जी महाराज विशेष रूप से उपस्थित रहे। इसके अलावा श्रीमहंत लक्ष्मण दास जी त्यागी, महामंडलेश्वर बाबूगिरी जी महाराज, महंत मोहन शरण शास्त्री, महंत संतदास जी महाराज, महंत रामदास जी रामायणी, महंत आशुतोष जी महाराज, महंत बलराम दास जी, महंत गोपाल दास जी महाराज, महंत मोनी बाबा, महंत रामगिरि जी महाराज सहित अनेक संत-महात्माओं ने अपने आशीर्वचन प्रदान किए।
संतों ने अपने संबोधन में कहा कि स्वामी हंसराम जी उदासीन महाराज के मार्गदर्शन में हरि शेवा उदासीन आश्रम धर्म, सेवा और आध्यात्मिक चेतना का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित भीलवाड़ा सांसद दामोदर अग्रवाल ने कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजनों से समाज में आध्यात्मिक चेतना का विस्तार होता है। वहीं शहर विधायक अशोक कुमार कोठारी ने भारतीय संस्कृति को विश्व की श्रेष्ठतम संस्कृति बताते हुए आश्रम को सेवा, संस्कार और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बताया।
सायंकाल आयोजित भव्य गंगा आरती में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। मंत्रोच्चार, भजन एवं जयघोषों से पूरा आश्रम परिसर भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो गया। रामधुनी विश्राम एवं समस्त पाठ-पारायण की पूर्णाहुति के साथ पुरुषोत्तम मास के धार्मिक आयोजनों का विधिवत समापन हुआ।
कार्यक्रम का संचालन निंबार्क आश्रम के महंत मोहन शरण शास्त्री ने किया। अंत में विप्र पूजन, संत सम्मान एवं महाप्रसादी के साथ कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर सनातन सेवा समिति, हंसगंगा हरि शेवा भक्त मंडल के सदस्य एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
