भीलवाड़ा। रायला क्षेत्र में रेलवे द्वारा आबादी क्षेत्र में दीवार बनाकर सार्वजनिक रास्ते बंद किए जाने के विरोध में ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। ग्रामीणों का आरोप है कि रेलवे विभाग ने आबादी क्षेत्र के रास्ते बंद कर करीब 5 हजार घरों की आबादी को आवाजाही से वंचित कर दिया है, जिससे लोगों का दैनिक जीवन प्रभावित हो गया है।
ग्रामीणों के अनुसार अजमेर-चित्तौड़गढ़ रेल दोहरीकरण परियोजना के तहत राजस्व क्षेत्र की सार्वजनिक भूमि और रास्तों की अवाप्ति की प्रक्रिया चल रही है। आरोप है कि रेलवे ने संबंधित भूमि पर कब्जा कर दीवार खड़ी कर दी, जिससे रेलवे स्टेशन खेड़ा क्षेत्र के लोगों के रास्ते पूरी तरह बंद हो गए हैं। अब स्कूली बच्चों, मजदूरों, मरीजों और प्रसूताओं को खेतों, कंटीली झाड़ियों और एक-दूसरे की छतों से होकर आने-जाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। वहीं रास्ता बंद होने से पेयजल के टैंकर भी प्रभावित क्षेत्र तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि पंचायत, जनप्रतिनिधियों और रेलवे अधिकारियों को कई बार ज्ञापन दिए जा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला। उनका कहना है कि रेलवे अधिकारियों ने पहले लिखित आश्वासन दिया था कि सार्वजनिक रास्तों को बंद नहीं किया जाएगा और केवल आवश्यक भूमि ही अधिग्रहित की जाएगी, लेकिन इसके विपरीत दीवार बनाकर रास्ते बंद कर दिए गए।
ज्ञापन में ग्रामीणों ने मांग की है कि यदि सार्वजनिक भूमि का अधिग्रहण किया जाता है तो उसके बदले समानांतर वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध कराया जाए, बंद किए गए सभी सार्वजनिक रास्ते तत्काल खोले जाएं तथा ग्रामवासियों की आपत्तियां सुने बिना भूमि अधिग्रहण से संबंधित कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया जाए।
ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि तीन दिनों के भीतर समस्या का समाधान नहीं किया गया तो गांव में उग्र आंदोलन, भूख हड़ताल तथा आगामी पंचायती राज चुनाव के पूर्ण बहिष्कार का निर्णय लिया जाएगा। इसकी समस्त जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
