टेक्सटाइल विजन 2027 में उद्योग का रोडमैप सुना, 2-3 माह में नई योजनाओं का लाभ मिलने के संकेत
नई दिल्ली/भीलवाड़ा। वस्त्रनगरी भीलवाड़ा में तैयार की गई डेनिम साड़ी ने दिल्ली के टेक्सटाइल मंच पर अपनी पहचान बनाई। भीलवाड़ा की उद्यमी पल्लवी लढा द्वारा फाइन काउंट में तैयार की गई इस अनूठी डेनिम साड़ी के नवाचार की केंद्रीय टेक्सटाइल मंत्री गिरिराज सिंह ने सराहना की।
यह नवाचार इंडिया हैबिटेट सेंटर, नई दिल्ली में आयोजित लघु उद्योग भारती के टेक्सटाइल डिवीजन के ‘टेक्सटाइल विजन 2027’ कॉन्क्लेव में सामने आया। कार्यक्रम में देशभर से आए टेक्सटाइल एमएसएमई उद्यमियों ने उद्योग की चुनौतियों, नीतिगत जरूरतों और भविष्य के विकास का रोडमैप केंद्रीय सरकार के समक्ष रखा।
कार्यक्रम का शुभारंभ केंद्रीय टेक्सटाइल मंत्री गिरिराज सिंह ने टेक्सटाइल कमिश्नर वृंदा देसाई, लघु उद्योग भारती टेक्सटाइल डिवीजन के हेड महेश हुरकट सहित राष्ट्रीय पदाधिकारियों और उद्योग प्रतिनिधियों की मौजूदगी में दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
लघु उद्योग भारती टेक्सटाइल डिवीजन के हेड महेश हुरकट ने स्वागत उद्बोधन में टेक्सटाइल एमएसएमई के सामने मौजूद प्रमुख समस्याओं और नीतिगत सुधारों की जरूरत को रेखांकित किया। उन्होंने छोटे एवं मध्यम उद्योगों को मजबूत करने, उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने तथा राष्ट्रीय और वैश्विक बाजार से जोड़ने के लिए सरकारी सहयोग की आवश्यकता बताई।
केंद्रीय मंत्री ने उद्योग प्रतिनिधियों की ओर से रखी गई मांगों पर सकारात्मक रुख जताते हुए कहा कि सरकार टेक्सटाइल क्षेत्र की समस्याओं और सुझावों पर गंभीरता से विचार कर रही है। उन्होंने टेक्सटाइल डिवीजन की करीब 70 प्रतिशत मांगों को पूरा करने का प्रयास करने का भरोसा दिलाया।
मंत्री ने कहा कि टेक्सटाइल एमएसएमई देश की अर्थव्यवस्था और रोजगार सृजन का महत्वपूर्ण आधार हैं। सरकार और उद्योग के बीच बेहतर समन्वय से इस क्षेत्र को और मजबूती मिल सकती है।
गिरिराज सिंह ने टेक्सटाइल सेक्टर के विजन 2047 का उल्लेख करते हुए कहा कि उद्योग के विकास के लिए व्यापक योजना तैयार की गई है। योजना का दायरा बड़ा होने के कारण इसके क्रियान्वयन में समय लग रहा है, लेकिन इसके परिणाम आने वाले वर्षों में दिखाई देंगे। उन्होंने कहा कि विजन 2047 के प्रभाव 2030-31 तक दिखाई देने शुरू हो जाएंगे।
उन्होंने टेक्सटाइल एमएसएमई के लिए आने वाली नई योजनाओं का भी उल्लेख किया और कहा कि सेक्टर को मजबूती देने के लिए कई योजनाएं लॉन्च की जाएंगी। इन योजनाओं का लाभ उद्यमियों को आगामी 2-3 महीनों में मिलना शुरू होने की संभावना है।
कॉन्क्लेव में टेक्सटाइल उद्योग की जमीनी समस्याओं से लेकर भविष्य की नीतियों, नवाचार, प्रतिस्पर्धात्मकता और वैश्विक बाजार में संभावनाओं पर चर्चा हुई। भीलवाड़ा की डेनिम साड़ी के नवाचार को मिली सराहना से स्थानीय टेक्सटाइल उद्योग में नए प्रयोगों और उत्पाद विकास की संभावनाओं को बल मिलने की उम्मीद है।
