भगवत् भक्ति और संतों का चरित्र ही जीवन का वास्तविक कल्याण : जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ
भीलवाड़ा।
सनातन सेवा समिति के तत्वावधान एवं हरि शेवा उदासीन आश्रम सनातन मंदिर में आयोजित पुरुषोत्तम मास महोत्सव के अंतर्गत पांच दिवसीय “भक्तमाल कथा” का भव्य शुभारंभ हुआ। महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम जी उदासीन महाराज के सानिध्य में आयोजित इस धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
कथा का वाचन ज्योतिर्मठ आवांतर भानपुरा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ जी महाराज द्वारा किया जा रहा है। कथा के प्रथम दिन आश्रम परिसर हरिनाम संकीर्तन, भजनों और आध्यात्मिक वातावरण से भक्तिमय हो उठा।
कार्यक्रम की शुरुआत महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन एवं संत समाज द्वारा व्यासपीठ पूजन और जगद्गुरु शंकराचार्य जी के स्वागत के साथ हुई।
अपने प्रवचन में जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ जी महाराज ने भक्तमाल ग्रंथ के मंगलाचरण “भक्त, भक्ति, भगवंत और गुरु” की व्याख्या करते हुए कहा कि भगवान, भक्त, भक्ति और गुरु तत्व रूप में एक ही हैं। उन्होंने कहा कि संतों और भक्तों के जीवन चरित्र का श्रद्धा भाव से श्रवण करने से मनुष्य के जीवन के संकट और विघ्न दूर होते हैं।
उन्होंने कहा कि इस संसार रूपी भवसागर से पार होने का सबसे श्रेष्ठ मार्ग भगवान की आराधना और भक्तों के यश का गान है। वेद, पुराण और इतिहास भी यही संदेश देते हैं कि ईश्वर और उनके भक्त दोनों ही वंदनीय हैं।
कथा के दौरान “भक्तिरसबोधिनी टीका” के माध्यम से महाप्रभु श्रीकृष्ण चैतन्य की भक्ति और हरिनाम संकीर्तन की महिमा का वर्णन किया गया। सुमधुर भजनों पर श्रद्धालु भावविभोर होकर झूम उठे और पूरा पांडाल भक्तिरस में डूब गया।
आयोजन समिति के अनुसार भक्तमाल कथा का आयोजन 30 मई तक प्रतिदिन दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक किया जाएगा। कथा के बाद महाआरती और प्रसाद वितरण भी किया गया।
इस दौरान विष्णु यज्ञ एवं रुद्राभिषेक में श्रद्धालुओं ने आहुतियां देकर धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया। आश्रम में प्रतिदिन विष्णु यज्ञ, गंगा आरती, हरिनाम संकीर्तन और अन्य धार्मिक कार्यक्रम श्रद्धा एवं उत्साह के साथ जारी हैं।
