श्रीमद्भागवत जीवन जीने की कला का दिव्य मार्गदर्शन देती है – कृपारामजी महाराज

खबर को शेयर करे :-

गोवर्धन लीला, अक्रूर प्रसंग एवं कंस उद्धार का भावपूर्ण वर्णन, भजनों पर झूमे श्रद्धालु

भीलवाड़ा, 7 जून। पूरणमल-सम्पत देवी रांदड़ परिवार के तत्वावधान में महेश वाटिका में आयोजित सप्तदिवसीय श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव के छठे दिवस कथा व्यास परम श्रद्धेय कृपारामजी महाराज (जोधपुर) ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल एवं किशोर लीलाओं का संगीतमय एवं भावपूर्ण वर्णन किया। कथा के दौरान प्रस्तुत भक्तिमय भजनों पर श्रद्धालु भावविभोर होकर झूम उठे तथा पूरा पांडाल कृष्णमय वातावरण से गुंजायमान हो गया।

कृपारामजी महाराज ने पूतना वध, बकासुर वध एवं अघासुर वध जैसे प्रसंगों का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने बाल्यकाल से ही अधर्म एवं दुष्ट शक्तियों का नाश कर धर्म की स्थापना का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि ईश्वर अपने भक्तों की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहते हैं।

गोवर्धन लीला का वर्णन करते हुए महाराजश्री ने बताया कि जब देवराज इन्द्र अपने अहंकारवश ब्रजभूमि पर प्रचंड वर्षा करने लगे, तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी तर्जनी अंगुली पर गोवर्धन पर्वत धारण कर समस्त ब्रजवासियों एवं गौधन की रक्षा की। उन्होंने कहा कि यह प्रसंग प्रकृति संरक्षण, गौसेवा और अहंकार त्याग का संदेश देता है। इस अवसर पर “गिरिराज धरण प्रभु तेरी शरण”, “मेरे सिर पर रख दो कान्हा अपने ये दोनों हाथ” एवं “सांवरिया आओ, छप्पन भोग लगाओ” जैसे भजनों पर श्रद्धालु भक्ति रस में डूब गए।

कथा में अक्रूरजी प्रसंग एवं श्रीकृष्ण के मथुरा गमन का वर्णन करते हुए कृपारामजी महाराज ने कहा कि भगवान का प्रत्येक कार्य लोककल्याण के लिए होता है। अक्रूरजी की अनन्य भक्ति और समर्पण का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भावविह्वल हो गए। इस दौरान “श्याम तेरी बंसी पुकारे राधा नाम”, “कन्हैया तेरी याद में” एवं “मुझे श्याम तेरे चरणों में बसा ले” जैसे भजनों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

कंस उद्धार प्रसंग का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि अधर्म, अन्याय और अत्याचार का अंत निश्चित है। भगवान श्रीकृष्ण ने कंस का वध कर धर्म की स्थापना एवं सत्य की विजय का संदेश दिया। “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की”, “यशोदा के लाल ने मचाई धूम” एवं “आओ मेरे सांवरे” जैसे भजनों पर श्रद्धालु नृत्य करते नजर आए।

कृपारामजी महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं बल्कि जीवन जीने की कला का दिव्य मार्गदर्शन है। इसके श्रवण से मनुष्य के जीवन में भक्ति, सदाचार, सेवा, करुणा एवं आध्यात्मिक चेतना का विकास होता है।

कथा के पश्चात कृपारामजी महाराज ने श्रद्धालुओं को गुरु मंत्र प्रदान किए तथा दो महत्वपूर्ण संकल्प दिलाए— पहला व्यसन छोड़ो और दूसरा पेड़ लगाओ। उन्होंने कहा कि इन दोनों संकल्पों से व्यक्ति और समाज दोनों का कल्याण संभव है।

कथा के अंत में आयोजित महाआरती में कैलाश जाजू, बजरंगलाल आगीवाल, सुवालाल रांदड़, राजकुमार रांदड़, सुनील पारीक, रमेश जाखोटिया, कैलाश धूत, मानकचंद रांदड़, गिरधर गोपाल लाहोटी, राजकुमार मनिहार, महेश हुरकट, राजकुमार तापड़िया एवं विजय रांदड़ सहित अनेक श्रद्धालुओं ने सहभागिता निभाई।

आयोजक कमलेश सोनी, पंकज रांदड़ एवं मोहित सोनी ने बताया कि कथा महोत्सव में मुंबई, सूरत, इचलकरंजी, मकराना, मंगलाना, किशनगढ़, परबतसर एवं मेड़ता सहित विभिन्न स्थानों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु धर्मलाभ प्राप्त करने पहुंचे।

आयोजक पीयूष सोनी ने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव का समापन 8 जून को हवन, पूर्णाहुति एवं महाआरती के साथ होगा। रात्रि में आयोजित भजन संध्या में जगदीश सोनी ने सुमधुर भजनों की प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।

खबर को शेयर करे :-
KP Times
KP Times
KP Times App
खबरें पढ़ें सीधे हमारे Android App पर
APP डाउनलोड