हरि शेवा उदासीन आश्रम में सतगुरु बाबा शेवाराम साहब का 110वां प्राकट्य उत्सव शुरू, गुरुकुल का शुभारंभ

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भीलवाड़ा। हरि शेवा उदासीन आश्रम सनातन मंदिर, भीलवाड़ा में आराध्य सतगुरु बाबा शेवाराम साहब के 110वें वार्षिक प्राकट्य उत्सव का शुभारंभ रविवार, 25 अक्टूबर को धार्मिक अनुष्ठानों, सत्संग और भजन-कीर्तन के साथ हुआ। उत्सव के प्रथम दिन श्री रामायण के अखंड पाठ का शुभारंभ किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हवन-पूजन हुआ, जिसमें श्रद्धालुओं एवं संत-महात्माओं ने आहुतियां दीं। संतों के प्रवचन, आरती, अरदास और भंडारे सहित विभिन्न धार्मिक आयोजन हुए।

महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन के सानिध्य में आयोजित कार्यक्रम में संत मयाराम, संत राजाराम, संत गोविंदराम, संत ईशानराम, संत सुयज्ञराम, संत केशवराम और बालक मिहिर ने भजनों के माध्यम से बाबा साहब की महिमा का गुणगान किया। इस दौरान राम राम जय राजाराम, राम राम जय सीताराम, भज मन नारायण नारायण तथा हरि रूप बाबा हरिराम, शिव रूप बाबा शेवाराम, गंगा रूप बाबा गंगाराम की धुन से आश्रम का वातावरण भक्तिमय हो गया।

पुष्कर के श्रीमहंत हनुमानराम उदासीन ने सतगुरु संग प्रीत रखो, बेड़ा पार हो जाएगा भजन प्रस्तुत कर सतगुरु की महिमा का वर्णन किया। भजन-कीर्तन की श्रृंखला में श्रीमहंत स्वरूपदास उदासीन अजमेर, स्वामी अमरलाल राजकोट, स्वामी मोहनदास, संत दास इंदौर, विजयमोहन शास्त्री चित्तौड़गढ़ सहित अन्य संतों ने भी प्रस्तुतियां दीं। संध्याकालीन सत्र में सत्संग, आरती और अरदास के बाद श्रद्धालुओं ने सतगुरुओं की समाधियों एवं धूणा साहब पर शीश नवाया। सतगुरुओं को 56 भोग प्रसाद अर्पित किया गया। संत-महात्माओं के लिए भंडारे और अन्न क्षेत्र की सेवा भी हुई।

सनातन धर्म और वैदिक शिक्षा के लिए गुरुकुल का शुभारंभ

बाबा साहब के प्राकट्य उत्सव और शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर हरि शेवा धर्मशाला के तत्वावधान में गुरुकुल का शुभारंभ किया गया। यहां इच्छुक विद्यार्थियों को सनातन धर्म, वेद, संस्कृत व्याकरण और ज्योतिष शास्त्र की शिक्षा प्रदान की जाएगी। गुरुकुल को महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन का संरक्षण प्राप्त होगा।

इस अवसर पर यजुर्वेदाचार्य पंडित विमलेश शास्त्री ने वेद एवं सनातन धर्म के महत्व पर प्रकाश डाला। यजुर्वेदाचार्य पंडित रोशन शास्त्री ने वैदिक शिक्षा की रूपरेखा प्रस्तुत की, जबकि श्री विद्या मठ, काशी के सामवेदाचार्य पंडित शंभूलाल ने गुरुकुल परंपरा की जानकारी दी। स्वस्ति वाचन, वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ गुरुकुल का शुभारंभ हुआ तथा विद्वान आचार्यों का अभिनंदन किया गया।

महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन ने कहा कि वैदिक शिक्षा की परंपरा को आगे बढ़ाना महापुरुषों की तपस्या का फल है। जीवन में कोई भी पुनीत कार्य गुरु कृपा और परमात्मा की कृपा से ही संपन्न होता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से सतगुरु के प्राकट्य उत्सव में हरि नाम संकीर्तन, सेवा और सुमिरन का लाभ लेने का आह्वान किया।

आज धर्म ध्वजा साहब की होगी स्थापना

संत गोविंदराम ने बताया कि उत्सव के दूसरे दिन सोमवार, 26 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा के अवसर पर विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम होंगे। सुबह 5 से 6 बजे तक समाधि साहब पर मौन प्रार्थना के रूप में नाम-स्मरण किया जाएगा। सुबह 8 बजे विधिवत पूजन के बाद धर्म ध्वजा साहब की स्थापना होगी।

इसके बाद हवन, पूजन और वंदन के कार्यक्रम होंगे। सुबह 11 बजे से सत्संग, श्री रामायण पाठ का भोग साहब, बाबा साहब के 110वें प्राकट्य उत्सव के उपलक्ष्य में लड्डू महाप्रसाद का भोग तथा अरदास-प्रार्थना होगी। दोपहर 1:30 बजे से संत-महात्माओं, विप्रजनों और श्रद्धालुओं के लिए भंडारे का आयोजन किया जाएगा। अन्नपूर्णा रथ के माध्यम से नगर की विभिन्न बस्तियों में प्रसाद एवं अन्न क्षेत्र की सेवा भी की जाएगी।

स्वामी हंसराम उदासीन ने सभी श्रद्धालुओं से उत्सव में पहुंचकर संतों के दर्शन, प्रवचन और सेवा-सुमिरन का लाभ लेने की अपील की।

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