रूणिया बरड़ा के बूथ नंबर 53 के बाहर मिले जले हुए मतपत्र, ग्रामीणों ने पोलिंग पार्टी को निलंबित करने की उठाई मांग; 56 वोटों से हारी प्रत्याशी ने विधायक पर लगाए मिलीभगत के आरोप
जहाजपुर (मोहम्मद आज़ाद नेब)। ग्राम पंचायत रूणिया बरड़ा और हनुमान नगर में मतपत्र जलाए जाने की घटना सामने आने से हड़कंप मच गया। रूणिया बरड़ा स्थित स्कूल के बूथ नंबर 53 के बाहर जले हुए मतपत्र मिलने के बाद ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया। सूचना पर तहसीलदार अमितेश मीणा, सीआई दयाराम चौधरी और पटवारी इस्लाम हुसैन मौके पर पहुंचे।
घटनास्थल पर बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्रित हो गए। सरपंच पद पर चुनाव हारने वाले प्रत्याशी भी मौके पर पहुंचे और मामले की जांच कराने की मांग की।
पोलिंग पार्टी को निलंबित करने की मांग
मौके पर पहुंचे तहसीलदार अमितेश मीणा ने ग्रामीणों से समझाइश की। इस दौरान ग्रामीणों ने चुनाव प्रक्रिया में लापरवाही की आशंका जताते हुए संबंधित पोलिंग पार्टी को निलंबित करने की मांग उठाई। ग्रामीणों का कहना था कि चुनाव से संबंधित सामग्री इस तरह बाहर मिलना गंभीर मामला है, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
निर्वाचन अधिकारी बोले—मतपत्र जलाने पर होगी कार्रवाई
निर्वाचन अधिकारी छत्रपाल सिंह चौधरी ने कहा कि चुनाव से संबंधित किसी भी सामग्री को नष्ट नहीं किया जा सकता। यदि जांच में मतपत्र जलाने के मामले में पोलिंग पार्टी की भूमिका सामने आती है, तो संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
56 वोटों से हारी प्रत्याशी ने विधायक पर लगाए आरोप
सरपंच पद पर 56 मतों से पराजित प्रत्याशी कृष्णा मीणा ने विधायक गोपीचंद मीणा पर मिलीभगत के आरोप लगाए। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इस संबंध में विधायक का पक्ष सामने आना बाकी है। बताया गया कि कृष्णा मीणा के पति नरेंद्र मीणा पूर्व में करीब 20 वर्षों से विधायक गोपीचंद मीणा के करीबी रहे हैं। ऐसे में मतपत्र मिलने की घटना ने स्थानीय राजनीतिक चर्चाओं को भी तेज कर दिया है।
तहसीलदार बोले—जांच का विषय है कि मतपत्र किसने जलाए
तहसीलदार अमितेश मीणा ने मीडिया को दिए बयान में बताया कि घटनास्थल पर जले हुए मतपत्र मिले हैं। उनके अनुसार, ये मतपत्र मतदान के बाद के बताए जा रहे हैं। हालांकि, मतपत्रों को किसने और किन परिस्थितियों में जलाया, यह जांच का विषय है। मामले में तथ्यों की पुष्टि और जिम्मेदारी तय करने के लिए जांच आवश्यक है।
अब सवाल यह है कि चुनाव से संबंधित मतपत्र बूथ के बाहर कैसे पहुंचे और उन्हें किसने जलाया? जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि इस घटना के पीछे किसकी भूमिका थी और क्या चुनावी नियमों का उल्लंघन हुआ है।
