खाद की कालाबाजारी पर सरकार सख्त! सब्सिडी वाली यूरिया-डीएपी का गलत इस्तेमाल करने पर 7 साल तक जेल

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भीलवाड़ा में 400 से अधिक खाद विक्रेताओं का निरीक्षण, अनियमितता मिलने पर 32 विक्रेताओं को नोटिस जारी

सब्सिडी वाली खाद का औद्योगिक उपयोग, अवैध भंडारण और जमाखोरी करने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई; अवैध परिवहन में लगे वाहन भी होंगे जब्त

खबर प्रसार टाइम्स

भीलवाड़ा। किसानों को रियायती दरों पर पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध कराने और खाद की कालाबाजारी पर अंकुश लगाने के लिए राजस्थान सरकार ने अनुदानित यूरिया एवं डीएपी के दुरुपयोग, अवैध भंडारण, जमाखोरी और औद्योगिक इकाइयों में डायवर्जन के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। कृषि आयुक्तालय ने प्रदेशभर के लिए कड़े निर्देश जारी कर स्पष्ट किया है कि किसानों के लिए मिलने वाली सब्सिडी वाली खाद का गैर-कृषि कार्यों में उपयोग करने वालों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। कार्रवाई में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही भी तय होगी।

कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने बताया कि केंद्र सरकार किसानों को सस्ती दरों पर खाद उपलब्ध कराने के लिए यूरिया के प्रति बैग पर लगभग 2,700 रुपये और डीएपी के प्रति बैग पर लगभग 3,500 रुपये तक की सब्सिडी दे रही है। इसका उद्देश्य किसानों की खेती की लागत कम करना और कृषि उत्पादन को बढ़ावा देना है। ऐसे में अनुदानित खाद का औद्योगिक अथवा अन्य गैर-कृषि कार्यों में उपयोग सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग है।

कालाबाजारी करने वालों को सात साल तक की सजा

आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 7 के तहत उर्वरक संबंधी नियमों का उल्लंघन करने पर तीन माह से सात वर्ष तक के कारावास और जुर्माने का प्रावधान है। वहीं धारा 10 के तहत दोषी कंपनियों के साथ उनके जिम्मेदार व्यक्तियों पर भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। अवैध परिवहन में इस्तेमाल किए गए वाहनों को भी नियमानुसार जब्त किया जा सकेगा।

कृषि विभाग ने उर्वरक निर्माता कंपनियों, थोक एवं खुदरा विक्रेताओं और औद्योगिक इकाइयों को नियमों की सख्ती से पालना करने के निर्देश दिए हैं। निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर खाद बेचने, अवैध बिक्री और सब्सिडी वाले उर्वरकों का गैर-कृषि उपयोग करने पर कार्रवाई होगी।

औद्योगिक इकाइयों को देना होगा हर महीने खरीद का हिसाब

यूरिया के गैर-कृषि उपयोग पर निगरानी मजबूत करने के लिए औद्योगिक, प्लाईवुड, रेजिन, पशु आहार सहित अन्य इकाइयों को प्रत्येक माह गैर-अनुदानित यूरिया की खरीद और उससे संबंधित उत्पादन का विवरण विभागीय अधिकारियों को देना होगा। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि उद्योगों में केवल नियमानुसार खरीदे गए गैर-अनुदानित यूरिया का ही उपयोग हो।

लापरवाह अधिकारियों पर भी होगी कार्रवाई

कृषि आयुक्तालय ने स्पष्ट किया है कि कालाबाजारी, अवैध भंडारण, जमाखोरी, डायवर्जन अथवा निर्धारित मूल्य से अधिक बिक्री की शिकायत मिलने पर संबंधित अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई करनी होगी। शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं करने वाले अधिकारियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की जाएगी।

सूचना देने वालों को मिलेगा नकद प्रोत्साहन

खाद की कालाबाजारी, अवैध परिवहन, जमाखोरी और डायवर्जन की प्रमाणिक सूचना देने वाले व्यक्तियों को राज्य सरकार की मुखबिर योजना के तहत निर्धारित प्रावधानों के अनुसार नकद प्रोत्साहन अथवा इनाम दिया जाएगा। इससे अवैध गतिविधियों पर निगरानी में आमजन की भागीदारी बढ़ेगी।

भीलवाड़ा में 400 से अधिक खाद विक्रेताओं का निरीक्षण, 32 को नोटिस

जिले में कृषि विभाग ने उर्वरक वितरण व्यवस्था पर निगरानी बढ़ा दी है। पिछले 15 दिनों में कृषि विभाग के आदान निरीक्षकों ने 400 से अधिक खाद विक्रेताओं के प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया। इस दौरान अनियमितताएं पाए जाने पर 32 विक्रेताओं को नोटिस जारी किए गए हैं।

भीलवाड़ा में डीएपी का पर्याप्त स्टॉक, यूरिया की आपूर्ति जारी

कृषि विभाग के अनुसार जिले में डीएपी की रबी सीजन की कुल आवश्यकता 9 हजार मैट्रिक टन है। इसके मुकाबले अब तक 10,770 मैट्रिक टन डीएपी प्राप्त हो चुका है। इसमें से 6,771 मैट्रिक टन किसानों को बेचा जा चुका है, जबकि 3,998 मैट्रिक टन विक्रेताओं के पास उपलब्ध है।

वहीं यूरिया की पूरे रबी सीजन में 40 हजार मैट्रिक टन आवश्यकता है। अब तक जिले को 27,409 मैट्रिक टन यूरिया प्राप्त हुआ है, जिसमें से 11,060 मैट्रिक टन किसानों को वितरित किया जा चुका है और 16,349 मैट्रिक टन विक्रेताओं के पास स्टॉक में उपलब्ध है।

रबी सीजन में किसानों को खाद उपलब्ध कराना प्राथमिकता

कृषि विभाग का कहना है कि रबी सीजन में किसानों को समय पर यूरिया और डीएपी उपलब्ध कराना सर्वोच्च प्राथमिकता है। अनुदानित खाद के अवैध डायवर्जन और गैर-कृषि उपयोग पर रोक लगने से वास्तविक किसानों को खाद मिलने में आसानी होगी। विभाग ने सभी संबंधित कंपनियों, विक्रेताओं और औद्योगिक इकाइयों को निर्देशों की तत्काल पालना सुनिश्चित करने को कहा है।

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