श्री जगन्नाथ यात्रा का हुआ स्वागत, प्रभु को किया विराजित
भीलवाड़ा। हरि शेवा उदासीन आश्रम में चल रहे वार्षिक वर्सी उत्सव के तीसरे दिन धार्मिक अनुष्ठानों, सत्संग और सेवा गतिविधियों का आयोजन श्रद्धा एवं उत्साह के साथ हुआ। श्री श्रीचन्द्र सिद्धान्त सागर के अखण्ड पाठ की पूर्णाहुति पर भोग लगाया गया तथा संत-महापुरुषों के सान्निध्य में श्रीरामचरितमानस के अखण्ड पाठ का शुभारंभ किया गया। देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालु संतों के दर्शन, सत्संग और सेवा-सुमिरन का लाभ प्राप्त कर रहे हैं।
महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन ने सत्संग में कहा कि भगवान श्रीराम का नाम सनातन संस्कृति का मूल आधार है और हमें अपनी जड़ों से जुड़े रहना चाहिए। उन्होंने सतगुरु बाबा शेवाराम साहब के जीवन, विभाजन के कठिन दौर में उनके योगदान और भीलवाड़ा में सेवा व सुमिरन की परंपरा स्थापित करने का उल्लेख करते हुए कहा कि आज आश्रम में संचालित विभिन्न सेवा प्रकल्प उन्हीं की प्रेरणा का परिणाम हैं।
दिनभर नित्य हवन-यज्ञ, पाठ-पारायण, अन्न क्षेत्र सेवा और संतों के प्रवचन आयोजित हुए। संत मयाराम, संत राजाराम, संत गोविंदराम, संत ईशानराम, संत केशवराम और संत सुयज्ञराम सहित उदासीन निर्वाण मंडल के अनेक संत-महात्माओं ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक मार्गदर्शन दिया। आरती एवं प्रार्थना के बाद संतों का भंडारा भी आयोजित किया गया।
शाम को श्री जगन्नाथ रथ यात्रा के आश्रम पहुंचने पर श्रद्धालुओं ने हर्षोल्लास के साथ स्वागत किया। भगवान जगन्नाथ को श्री हरि सिद्धेश्वर मंदिर में विराजित किया गया तथा श्रद्धालुओं को ठंडाई और प्रसाद वितरित किया गया। रात्रि में विभिन्न भजन मंडलियों ने भक्ति संध्या में भजनों की प्रस्तुति दी।
आज मनाई जाएगी 30वीं वार्षिक वर्सी
वार्षिक वर्सी उत्सव के अंतिम एवं चतुर्थ दिवस पर सतगुरु बाबा गंगाराम साहब की 30वीं वार्षिक वर्सी श्रद्धापूर्वक मनाई जाएगी। इस अवसर पर सतगुरुओं की समाधि पर विशेष पूजन-अर्चन, नित्यनेम, हवन-यज्ञ, हनुमान चालीसा, श्री मात्रा साहब पाठ, श्रीरामचरितमानस अखण्ड पाठ की पूर्णाहुति एवं भोग, संतों के सत्संग-प्रवचन, संत भंडारा और आम भंडारे का आयोजन होगा। शाम को सत्संग के साथ चार दिवसीय वार्षिक वर्सी उत्सव का समापन किया जाएगा।
