जहाजपुर क्षेत्र में कपास, मक्का व उड़द फसलों का सघन सर्वेक्षण, फिलहाल आर्थिक नुकसान स्तर से कम मिला कीट प्रकोप

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किसानों को सुरक्षित कीटनाशक उपयोग का दिया प्रशिक्षण, कपास में लगाए फेरोमोन ट्रैप व नीले चिपचिपे ट्रैप

जहाजपुर (मोहम्मद आज़ाद नेब) कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय (भारत सरकार) के टिड्डी एवं एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केंद्र, जयपुर तथा कृषि विभाग, भीलवाड़ा के संयुक्त तकनीकी दल ने गुरुवार को जहाजपुर, जलमपुरा, बिहाड़ा, जीरा, हाथोड़िया, खजुरिया खेड़ा और पंडेर क्षेत्र में कपास, मक्का, उड़द एवं ज्वार की फसलों का सघन सर्वेक्षण किया।

सर्वेक्षण दल में सहायक वनस्पति संरक्षण अधिकारी श्योराम एवं डॉ. जगदीश यादव, कृषि विभाग जहाजपुर के सहायक कृषि अधिकारी सीताराम मीणा, कृषि पर्यवेक्षक दिनेश मीणा तथा दुर्गालाल मीणा शामिल रहे।निरीक्षण के दौरान दल ने कपास की फसल में थ्रिप्स, सफेद मक्खी एवं जैसिड (हॉपर), मक्का में फॉल आर्मी वॉर्म तथा उड़द में येलो मोजेक रोग का प्रभाव देखा। हालांकि अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में इन कीटों एवं रोगों का प्रकोप आर्थिक नुकसान स्तर (ETL) से नीचे है, इसलिए किसानों को घबराने की आवश्यकता नहीं है।

अधिकारियों ने किसानों को नियमित रूप से फसलों की निगरानी करने तथा कीटों का प्रकोप बढ़ने पर केवल सीआईबी एंड आरसी (CIB&RC) द्वारा अनुशंसित कीटनाशकों का ही उपयोग करने की सलाह दी।इस अवसर पर किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किया गया, जिसमें किसानों को कीटनाशकों के सुरक्षित, संतुलित एवं विवेकपूर्ण उपयोग की जानकारी दी गई। साथ ही कुछ किसानों के कपास खेतों में गुलाबी सुंडी की निगरानी एवं नियंत्रण के लिए फेरोमोन ट्रैप तथा अन्य कीटों की रोकथाम हेतु नीले चिपचिपे ट्रैप लगाए गए। किसानों को इन तकनीकों के महत्व और समेकित कीट प्रबंधन (आईपीएम) के लाभों के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई।

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