संगम विश्वविद्यालय के पुस्तकालय विज्ञान विभाग में दो दिवसीय पुनश्चर्या कार्यक्रम सम्पन्न

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आधुनिक सूचना प्रौद्योगिकी युग में लाईब्रेरियन्स की अपार रोजगार संभावनाएं है- प्रो. करूणेश सक्सेना, कुलपति

भीलवाड़ा। सूचना प्रौद्योगिकी के वर्तमान दौर में लाईब्रेरियन्स का दायित्व विविधतापूर्ण एवं चुनौतिपूर्ण हो गया है। परम्परागत लाईब्रेरियन के बजाय अब उन्हें नवीनतम सूचना प्रदाता की भूमिका निभाने की आवश्यकता है। यह उद्गार संगम विश्वविद्यालय के पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभाग के तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय पुनश्चर्या कार्यक्रम में संगम विश्वविद्यालय के कुलसचिव डा. आलोक कुमार ने व्यक्त किये। इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कला एवं मानविकी संकाय के सह अधिष्ठाता डा. हितकरण राणावत ने कहा कि पुस्तकालय विज्ञान एक व्यावसायिक पाठ्यक्रम है जिसमें रोजगार के सरकारी एवं निजी दोनों ही संस्थाओं में प्रचुर अवसर मिलते है। विभागाध्यक्ष डा. अनिल शर्मा ने कहा कि पुस्तकालय विज्ञान के प्रशिक्षित विद्यार्थियों का भविष्य उज्जवल है। इस विषय में निरंतर अद्यतन रहकर इन विद्याार्थियों को प्रतियोगी परीक्षा उत्तीर्ण करने का लक्ष्य साधने की आवश्यकता है। मुख्य वक्ता राजस्थान विश्वविद्यालय के पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर – विषय विशेषज्ञ डा. महेन्द्र सिंह राव ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि आज के लाईब्रेरियन्स को नवीन तकनीक को सीखते हुए अपना कौशल बढ़ाकर समाज में ज्ञान के संचार में सहयोग करना चाहिये।अगले दिन आयोजित समापन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संगम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. करूणेश सक्सेना ने कहा कि विभिन्न सरकारी महाविद्यालयों में लम्बे समय से रिक्त पदों की भविष्य में भर्ती को देखते हुए इस पाठ्यक्रम में रोजगार की अपार संभावनाएं है। मुख्य वक्ता राजकीय महाविद्यालय, सागर (मध्यप्रदेश) के पूर्व लाईब्रेरियन डा. शैलेश आचार्य ने कहा कि समाज में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढते प्रभाव के दौर में विश्वसनीय सूचना के लिए लाईब्रेरियन्स की भूमिका अहम् हो गई है। कार्यक्रम का संचालन पूर्णिमा पारीक ने किया तथा धन्यवाद युवराज भट्ट ने दिया।

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