जहाजपुर व खजूरी की पंचायतों में महिला नेतृत्व की परीक्षा ; महिला सरपंचों के काम में पति का दखल पड़ेगा भारी

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जहाजपुर (मोहम्मद आज़ाद नेब) पंचायती राज चुनाव के बाद जहाजपुर व खजूरी पंचायत समिति क्षेत्र में महिला नेतृत्व को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। क्षेत्र की ग्राम पंचायतों में 50% महिला सरपंच निर्वाचित हुई हैं। अब सवाल यह है कि इन पंचायतों की कमान वास्तव में निर्वाचित महिला सरपंचों के हाथ में रहेगी या उनके पति पंचायत के कामकाज में दखल देकर फैसलों को प्रभावित करेंगे।

इन पंचायतों में अब महिला जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली, निर्णय लेने की क्षमता और ग्रामीण समस्याओं के समाधान पर सबकी नजर रहेगी।

महिला सरपंच की जगह पति ने संभाली पंचायत तो उठेंगे सवाल

पंचायती राज व्यवस्था में महिला आरक्षण का उद्देश्य महिलाओं को राजनीतिक भागीदारी के साथ वास्तविक नेतृत्व और निर्णय लेने का अधिकार देना है। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में कई बार महिला जनप्रतिनिधियों की जगह उनके पति या परिजन पंचायत का कामकाज संभालते नजर आते हैं। ऐसी स्थिति में यह सवाल उठना लाजिमी है कि जनता ने जिसे चुना, पंचायत चलाने का अधिकार भी उसी के पास है या नहीं।

महिला सरपंच का पति पंचायत के काम में सहयोग या सलाह दे सकता है, लेकिन निर्वाचित सरपंच के वैधानिक अधिकारों का स्थान नहीं ले सकता। आधिकारिक बैठकों में सरपंच की जगह निर्णय लेना, सरकारी अधिकारियों को स्वयं अधिकृत पदाधिकारी की तरह निर्देश देना अथवा पंचायत के अधिकारों का अनधिकृत इस्तेमाल करना शिकायत और जांच का विषय बन सकता है।

राजस्थान सरकार के निर्देशों में भी सख्ती की चेतावनी

महिला सरपंचों के कामकाज में उनके पति या रिश्तेदारों के हस्तक्षेप का मुद्दा पहले भी उठता रहा है। राजस्थान सरकार ने वर्ष 2020 में महिला सरपंचों के काम में उनके पतियों और परिजनों के हस्तक्षेप को लेकर सख्ती बरतने संबंधी निर्देशों की चर्चा की थी। ऐसे मामलों में निर्वाचित प्रतिनिधि के अधिकारों का सम्मान करने और अनधिकृत हस्तक्षेप पर कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया गया था।

इसका मूल संदेश स्पष्ट है महिला को निर्वाचित करने के बाद उसके अधिकार किसी दूसरे व्यक्ति को सौंपे नहीं जा सकते। हालांकि, किसी विशेष मामले में कार्रवाई लागू नियमों, संबंधित आदेशों और जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर ही की जा सकती है।

शिकायत कहां करें, क्या हो सकती है कार्रवाई?

यदि किसी महिला सरपंच का पति पंचायत के आधिकारिक कामकाज में अनुचित हस्तक्षेप करता है, तो ग्रामीण या संबंधित पक्ष लिखित शिकायत विकास अधिकारी (BDO), पंचायत समिति के सक्षम अधिकारी अथवा जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) को दे सकते हैं। शिकायत में घटना की तारीख, स्थान, संबंधित कार्यवाही और उपलब्ध साक्ष्य का उल्लेख करना चाहिए।

शिकायत मिलने पर सक्षम अधिकारी मामले की जांच कर सकते हैं। यदि जांच में सरकारी कामकाज में बाधा, रिकॉर्ड में अनधिकृत हस्तक्षेप, धमकी, दबाव या वित्तीय अनियमितता जैसे तथ्य सामने आते हैं, तो मामले की प्रकृति के अनुसार विभागीय या कानूनी कार्रवाई हो सकती है। आपराधिक कृत्य सामने आने पर पुलिस को भी शिकायत दी जा सकती है।

हालांकि, केवल पति के पंचायत में मौजूद होने या पत्नी को सलाह देने से अपने आप कार्रवाई नहीं होती। कार्रवाई के लिए वास्तविक हस्तक्षेप और संबंधित नियमों का उल्लंघन साबित होना जरूरी है। सरपंच को पद से हटाने जैसी कार्रवाई भी निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के बिना नहीं की जा सकती।

अब कामकाज बताएगा, महिला नेतृत्व कितना मजबूत

जहाजपुर व खजूरी की ग्राम पंचायतों में महिला सरपंचों के सामने विकास कार्यों को गति देने और जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने की चुनौती है। सड़क, नाली, पेयजल, सफाई, सरकारी योजनाओं और ग्राम सभा से जुड़े फैसले बताएंगे कि निर्वाचित महिलाएं अपने अधिकारों का इस्तेमाल किस तरह करती हैं।

अब निगाहें पंचायतों के साथ प्रशासन पर भी रहेंगी। क्या महिला सरपंच स्वयं बैठकों की अध्यक्षता करेंगी, विकास कार्यों की निगरानी करेंगी और ग्रामीणों की समस्याओं पर निर्णय लेंगी? और यदि उनके अधिकारों में अनधिकृत हस्तक्षेप हुआ तो क्या प्रशासन निष्पक्ष कार्रवाई करेगा?

महिला आरक्षण की असली सफलता केवल महिलाओं के सरपंच बनने में नहीं, बल्कि उनके स्वतंत्र रूप से पंचायत चलाने और अपने फैसले स्वयं लेने में है।

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