पालिका अध्यक्ष की कुर्सी पर सियासत या जातीय समीकरण? मीणा समाज के विरोध से जहाजपुर में बढ़ी राजनीतिक हलचल

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विधायक गोपीचंद मीणा के फैसले के विरोध में मीणा समाज लामबंद, प्रशासन-पुलिस अलर्ट मोड पर

1994 के बाद क्या पहली बार सामान्य वर्ग के खाते में जाएगी जहाजपुर पालिका अध्यक्ष की कुर्सी?

जहाजपुर। नगर पालिका अध्यक्ष पद को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। भाजपा द्वारा अलकेश देवी वैष्णव को अध्यक्ष पद का प्रत्याशी बनाए जाने के बाद मीणा समाज खुलकर विरोध में सामने आया है। समाज का तर्क है कि पालिका में मीणा समाज के 8 पार्षद निर्वाचित होकर आए हैं, ऐसे में अध्यक्ष पद पर समाज की दावेदारी होनी चाहिए।

इधर, विधायक गोपीचंद मीणा के फैसले को लेकर समाज के भीतर नाराजगी की स्थिति सामने आने से जहाजपुर की राजनीति में नया मोड़ आ गया है। मांगट देव परिसर में समाज की बैठक के बाद विरोध के स्वर तेज हुए और विधायक के बहिष्कार तक की मांग उठने लगी।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जातीय समीकरण पालिका अध्यक्ष के चुनाव पर हावी होंगे या पार्टी का निर्णय अंतिम साबित होगा?

साथ ही जहाजपुर की राजनीतिक चर्चा में 1994 के बाद पहली बार सामान्य वर्ग से पालिका अध्यक्ष बनने की संभावना भी प्रमुखता से सामने आ रही है।

मीणा समाज के विरोध और बदलते राजनीतिक घटनाक्रम को देखते हुए पुलिस एवं प्रशासन भी अलर्ट मोड पर नजर आ रहा है। आने वाले घंटों में होने वाली राजनीतिक गतिविधियों पर पूरे जहाजपुर की नजरें टिकी हैं।

जहाजपुर में अध्यक्ष की कुर्सी अब सिर्फ चुनाव नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रतिष्ठा और सामाजिक समीकरणों का बड़ा मुद्दा बनती दिखाई दे रही है।

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