संगम विश्वविद्यालय में ‘राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका’ विषय पर युवा संवाद कार्यक्रम आयोजित
भीलवाड़ा। संगम विश्वविद्यालय में कला एवं मानविकी संकाय तथा ट्रेनिंग एवं प्लेसमेंट सेल, प्रबंधन संकाय, विधि संकाय एवं भेषज विज्ञान संकाय के संयुक्त तत्वावधान में ‘राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका’ विषय पर युवा संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम का स्वागत उद्बोधन कला एवं मानविकी संकाय के अधिष्ठाता प्रो. डॉ. राजकुमार चतुर्वेदी ने किया। अध्यक्षीय उद्बोधन में विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. आलोक कुमार ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था को चार ट्रिलियन से बढ़ाकर छह ट्रिलियन डॉलर तक ले जाने और वर्ष 2047 तक विकसित भारत के सपने को साकार करने की जिम्मेदारी काफी हद तक युवाओं के कंधों पर है।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता राजस्थान क्षेत्र के क्षेत्रीय बौद्धिक शिक्षण प्रमुख डॉ. श्रीकांत ने भारत के गौरवशाली अतीत और राष्ट्र निर्माण में देश के योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने स्वामी रामतीर्थ के जापान यात्रा से जुड़े प्रसंग का उल्लेख करते हुए युवाओं में स्वदेश प्रेम और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का आह्वान किया।

डॉ. श्रीकांत ने भारत के जापान, फ्रांस, अमेरिका, इजराइल और कंबोडिया सहित विभिन्न देशों के निर्माण एवं विकास में दिए गए योगदान की जानकारी विद्यार्थियों को दी। उन्होंने संस्कारों का महत्व, नारी सम्मान, युवाओं की क्षमता, राष्ट्र निर्माण, संसाधनों के विकास और रोजगार सृजन जैसे विषयों पर व्यावहारिक उदाहरण प्रस्तुत कर विद्यार्थियों को प्रेरित किया।
उन्होंने युवाओं से स्वभाषा, स्वबोध और नागरिक शिष्टाचार को जीवन में अपनाने का संकल्प लेने का आह्वान किया। साथ ही कहा कि युवा अपनी क्षमता और सकारात्मक सोच के माध्यम से भारत की प्रतिष्ठा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
संवाद सत्र में विद्यार्थियों ने राष्ट्र की समस्याओं, राष्ट्र निर्माण, देश के भविष्य और विकसित भारत से जुड़े विभिन्न सवाल पूछे। डॉ. श्रीकांत ने उदाहरणों के माध्यम से विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया।
कार्यक्रम में कला एवं मानविकी, विधि, प्रबंधन एवं भेषज विज्ञान संकाय के विद्यार्थी और संकाय सदस्य मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अनुराग शर्मा ने किया।
