RTE पुनर्भरण राशि में देरी पर निजी स्कूल संचालकों का फूटा आक्रोश, सद्बुद्धि यज्ञ कर विभाग को चेताया

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4281 विद्यार्थियों की शिक्षा का जिम्मा निभा रहे निजी विद्यालय, 11.58 करोड़ रुपये की पुनर्भरण राशि बकाया होने का दावा

भीलवाड़ा। RTE के तहत निजी विद्यालयों को मिलने वाली पुनर्भरण राशि का भुगतान लंबे समय से लंबित होने के विरोध में निजी स्कूल संचालकों का आक्रोश अब खुलकर सामने आने लगा है। गुरुवार को एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट स्कूल्स, भीलवाड़ा के नेतृत्व में जिले के निजी विद्यालय संचालकों ने सद्बुद्धि यज्ञ का आयोजन कर शिक्षा विभाग को शीघ्र भुगतान करने का संदेश दिया। कार्यक्रम में जिले के दूर-दराज क्षेत्रों से बड़ी संख्या में विद्यालय संचालक शामिल हुए।

खबर प्रसार टाइम्स

संगठन के पदाधिकारियों ने बताया कि निजी विद्यालय RTE के तहत विद्यार्थियों को प्रवेश देकर उनकी शिक्षा और विद्यालयी व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी लगातार निभा रहे हैं, लेकिन सरकार की ओर से मिलने वाली पुनर्भरण राशि का भुगतान समय पर नहीं हो रहा है। इसके चलते विद्यालयों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

संगठन के अनुसार, पिछले वर्ष जिले के निजी विद्यालयों में RTE के तहत 4281 विद्यार्थियों को प्रवेश दिया गया था। इन विद्यार्थियों की शिक्षा पर विद्यालय लगातार खर्च कर रहे हैं, लेकिन अब तक मात्र 1 करोड़ 90 लाख रुपये का भुगतान हुआ है, जबकि करीब 11 करोड़ 58 लाख रुपये की राशि बकाया है।

विद्यालय संचालकों का कहना है कि शिक्षकों एवं कर्मचारियों के वेतन, भवन, परिवहन और अन्य शैक्षणिक व्यवस्थाओं का खर्च नियमित रूप से उठाना पड़ता है। ऐसे में पुनर्भरण राशि का लंबे समय तक अटके रहना विद्यालयों की आर्थिक स्थिति को प्रभावित कर रहा है।

संगठन ने कहा कि निजी विद्यालय सरकार से कोई अनुदान या एहसान नहीं मांग रहे हैं, बल्कि RTE के तहत अपनी वैध पुनर्भरण राशि की मांग कर रहे हैं। विभागीय प्रक्रिया और लंबित फाइलों के कारण भुगतान में हो रही देरी अब असहनीय होती जा रही है।

सद्बुद्धि यज्ञ के माध्यम से विभागीय अधिकारियों से मांग की गई कि लंबित आपत्तियों का तत्काल निस्तारण किया जाए तथा जिन बिलों में कोई आपत्ति नहीं है, उनका भुगतान प्राथमिकता से किया जाए। साथ ही लंबित बिलों को शीघ्र ट्रेजरी में भिजवाकर भुगतान सुनिश्चित किया जाए।

विद्यालय संचालकों ने चेतावनी दी कि यदि भुगतान प्रक्रिया में जल्द ठोस प्रगति नहीं हुई तो संगठन अपने अधिकारों के लिए व्यापक लोकतांत्रिक आंदोलन करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यालय संचालकों की मौजूदगी ने संगठन की एकजुटता प्रदर्शित की। संगठन ने विभाग को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि अब आश्वासन नहीं, परिणाम चाहिए और देरी नहीं, भुगतान चाहिए।

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