श्री शिवमहापुराण के आखिरी दिन श्री देवकिशन जी शास्त्री जी ने बताया कि भगवान हमेशा दुःख की घड़ी में भक्तों का साथ देते है

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शाहपुरा (भीलवाड़ा)-राजेन्द्र खटीक।

शाहपुरा। श्री खान्या के बालाजी मंदिर प्रांगण में महंत श्री श्री 108 श्री रामदास जी त्यागी की असीम अनुकम्पा से चल रही सप्त दिवसीय श्री शिवमहापुराण कथा का सोमवार को समापन हुआ। कथा के अंतिम दिन कथा वाचक पंडित श्री देवकिशन जी शास्त्री ने भगवान की भक्ति और जीवन में दुख के महत्व पर प्रकाश डाला।

शास्त्री जी ने कहा कि दुनिया में बिना रोए कभी भगवान नहीं मिलते। भगवान की प्राप्ति के लिए भक्त को कठिनाइयों और दुखों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने मीरा बाई का उदाहरण देते हुए कहा कि मीरा ने श्रीकृष्ण की भक्ति में अनेक कष्ट सहे, घर-परिवार छोड़ा और गांव-गांव जाकर भगवान के भजन गाए। उनकी अटूट भक्ति और तपस्या के बाद उन्हें भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन हुए। उन्होंने कहा कि सुख के समय मनुष्य अक्सर भगवान को भूल जाता है, जबकि दुख की घड़ी में सच्चे मन से भगवान का स्मरण करता है।

कथा के दौरान शास्त्री जी ने भगवान गणेश के परिवार का भी वर्णन किया। उन्होंने बताया कि भगवान गणेश की पत्नियां सिद्धि और ऋद्धि मानी गई हैं तथा उनके पुत्र शुभ और लाभ हैं। शुभ और लाभ के पुत्र आमोद और प्रमोद को भगवान गणेश के पौत्र बताया गया।

कथा के अंतिम दिन बालाजी महिला मंडल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भक्ति का आनंद लिया। महिलाओं ने भगवान के भजनों पर नाचते-गाते हुए श्रद्धा और उल्लास के साथ कथा का समापन किया। इससे पूर्व नर्बदेश्वर महादेव मंडल की ओर से 151 किलो खीर की प्रसादी का वितरण किया गया था। सोमवार को कथा के समापन अवसर पर सभी भक्तजनों के लिए भोजन प्रसादी की व्यवस्था भी की गई।

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