भीलवाड़ा। हिंदू धर्म में श्रावण मास को भगवान शिव की आराधना के लिए वर्ष का सबसे पवित्र माह माना गया है। अपर्णा ज्योतिष कार्यालय, लाछुड़ा के आचार्य पंडित योगेश शिक्षा शास्त्री ने बताया कि श्रावण मास का प्रत्येक सोमवार विशेष महत्व रखता है। इस वर्ष श्रावण का पहला सोमवार 3 अगस्त 2026 को है, जिस दिन शिवालयों में जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विशेष पूजन-अर्चना के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ की आराधना करेंगे।
आचार्य शास्त्री ने बताया कि सावन मास में भगवान शिव को जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और भस्म अर्पित करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। सोमवार का दिन स्वयं भगवान शिव को समर्पित माना जाता है, इसलिए सावन के सोमवारों का धार्मिक महत्व कई गुना बढ़ जाता है।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष सावन के सोमवार 3 अगस्त, 10 अगस्त, 17 अगस्त और 24 अगस्त 2026 को पड़ रहे हैं। कई श्रद्धालु पहले सावन सोमवार से सोलह सोमवार व्रत की शुरुआत करते हैं, जो लगातार 16 सोमवार तक रखा जाता है। मान्यता है कि इस व्रत से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।आचार्य योगेश शिक्षा शास्त्री के अनुसार, पौराणिक मान्यताओं में वर्णित है कि श्रावण मास में भगवान शिव देवी पार्वती के साथ अपने ससुराल पधारते हैं। इसी कारण यह माह शिव उपासना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है और देशभर के शिवालयों में श्रद्धालुओं की विशेष भीड़ उमड़ती है।
उन्होंने कहा कि सावन सोमवार का व्रत अविवाहित युवक-युवतियों के लिए विशेष फलदायी माना गया है। श्रद्धा और नियमपूर्वक भगवान शिव की पूजा करने से मनचाहा जीवनसाथी मिलने, वैवाहिक जीवन में सुख-शांति, करियर एवं व्यापार में सफलता, स्वास्थ्य लाभ तथा जीवन की विभिन्न बाधाओं के निवारण का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
आचार्य शास्त्री ने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे सावन सोमवार के अवसर पर भगवान शिव का विधि-विधान से पूजन करें, जलाभिषेक करें और धार्मिक आस्था के साथ व्रत रखकर शिव कृपा प्राप्त करें।
